पाली में 19 साल पहले 86 लोगों की मौत वाला खतरनाक रास्ता आज भी जर्जर
देसूरी नाल से चारभुजा तक 9 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है
पाली जिले के देसूरी नाल में 7 सितंबर 2007 को हुए हादसे में 86 लोगों की मौत हुई थी और यह खतरनाक रास्ता आज भी जर्जर अवस्था में है। इस मार्ग पर सुरक्षा सुधार के लिए 9 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी अनुमानित लागत 2 हजार करोड़ रुपए है। देसूरी-चारभुजा के बीच इस परियोजना की डीपीआर बनी है और सुधार कार्य चल रहा है।
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पाली। पाली जिले के देसूरी नाल में 7 सितंबर 2007 को हुए हादसे में 86 लोगों की मौत हुई थी। यह खतरनाक रास्ता आज भी जर्जर हालत में है और कई हादसों का कारण बना है। इस मार्ग पर सुरक्षा सुधार के लिए एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव है।
देसूरी नाल से होकर रामदेवरा जा रहा एक ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया था। इस हादसे में 86 से अधिक यात्रियों की जान चली गई थी। राजसमंद चिकित्सालय में शव रखने की जगह तक नहीं बची थी, इसलिए शेमल गांव में 30 लोगों को एक ही चिता पर जलाया गया।
इस क्षेत्र की सड़क की ज्यामिति खराब है, जिसमें तीखे मोड़, अधिक ढाल और अपर्याप्त दृश्य दूरी शामिल हैं। सड़क की सतह और जल निकासी व्यवस्था भी खराब है, जिससे वाहन चलाना असुरक्षित हो जाता है।
वन क्षेत्र में सड़क की ज्यामिति, पेवमेंट और ड्रेनेज में सुधार के लिए नदी की ओर सिंगल पियर पर एलिवेटेड रोड विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे सड़क की ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज ज्यामिति में सुधार होगा और पर्यावरणीय व्यवधान कम होगा।
यह प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पुराने एसएच-16 के किमी 281/500 से किमी 290/00 के बीच है, जो राजसमंद और पाली जिले की सीमा पर मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ता है। इस 9 किलोमीटर लंबी परियोजना की अनुमानित लागत 2 हजार करोड़ रुपए है।
केन्द्रीय मंत्री सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को पाली से चारभुजा तक के मार्ग को बनाने के लिए आग्रह किया गया है। इस मार्ग पर देसूरी से चारभुजा के बीच अरावली की पहाड़ियों के वन क्षेत्र में एलिवेटेड रोड और टनल बनाने का प्रस्ताव है।
पाली के अधीक्षण अभियंता अंजू चौधरी ने बताया कि देसूरी-चारभुजा के बीच एलिवेटेड रोड की डीपीआर बनी थी और उसमें सुधार का कार्य चल रहा है।
इस खतरनाक रास्ते पर वाहन चालक आज भी सावधानी बरतते हैं। 19 वर्षों में यह नाल अलग-अलग हादसों में डेढ़ सौ से अधिक लोगों की जान ले चुका है। हादसे के बाद पुलिस और परिवहन विभाग ने इस क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पाली जिले के इस खतरनाक रास्ते की मुख्य समस्या क्या है?
- सड़क की ज्यामिति खराब है, जिसमें तीखे मोड़, अधिक ढाल और अपर्याप्त दृश्य दूरी शामिल है।
- एलिवेटेड रोड बनने से क्या लाभ होंगे?
- सड़क की ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज ज्यामिति में सुधार होगा और पर्यावरणीय व्यवधान कम होगा।
- राजसमंद चिकित्सालय हादसे के बाद श्मशान घाट की स्थिति क्या थी?
- मृतकों की संख्या अधिक होने के कारण शव रखने की जगह नहीं बची, इसलिए 30 लोगों को एक ही चिता पर जलाया गया।
- एलिवेटेड रोड की डीपीआर की वर्तमान स्थिति क्या है?
- देसूरी-चारभुजा के बीच एलिवेटेड रोड की डीपीआर बनी है और उसमें सुधार का काम जारी है।
- सरकार ने रास्ते की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
- पुलिस और परिवहन विभाग ने इस क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया है और केंद्रीय मंत्री से मार्ग निर्माण की मांग की गई है।
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