स्वरा भास्कर के बयान पर सांसद और संगठन के बीच तीखी बहस
आगरा में प्रदर्शनकारियों ने स्वरा की जुबान काटने पर 1.51 लाख रुपये इनाम का ऐलान किया
बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के पद्मावत फिल्म में जौहर सीन पर सवाल उठाने के बाद विवाद बढ़ गया है। इस मुद्दे पर सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस हुई। आगरा में प्रदर्शनकारियों ने स्वरा की जुबान काटने वाले को 1.51 लाख रुपये नकद इनाम देने की घोषणा की।
विवाद की शुरुआत और स्वरा का बयान
यह विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम' कार्यक्रम में शुरू हुआ। स्वरा भास्कर ने फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर के सीन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जौहर का इस तरह महिमामंडन करना समाज में गलत संदेश देता है। उन्होंने पूछा कि क्या किसी महिला की शारीरिक पवित्रता को उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती माना जाना चाहिए और क्या इससे बलात्कार पीड़ितों को यह संदेश नहीं जाता कि उनका जीवित रहना गलत है। बाद में स्वरा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर सफाई दी कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा था। उनका विरोध आधुनिक फिल्मों द्वारा ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं के महिमामंडन से था।
प्रदर्शन और विरोध
आगरा में दक्षिणपंथी संगठन योगी यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने स्वरा के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके पोस्टर जलाए और पैरों से रौंदा। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने इस दौरान स्वरा के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की और कहा कि रानी पद्मावती और जौहर करने वाली वीरांगनाओं का बलिदान भारत के स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत की ऐतिहासिक और धार्मिक संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तोमर ने स्वरा की जुबान काटने वाले को 1.51 लाख रुपये नकद इनाम देने का ऐलान किया।
सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और कीर्ति राठौड़ का बयान
स्वरा भास्कर और शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के बीच सोशल मीडिया पर बहस हुई। प्रियंका ने महिलाओं की पसंद, ऐतिहासिक संदर्भ और जौहर के अंतर को समझाते हुए स्वरा के तर्कों का विरोध किया। करणी सेना की महिला विंग की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने भी स्वरा को उनकी भाषा सुधारने की सलाह दी और कहा कि किसी को भी सनातन परंपराओं या राजपूत महिलाओं के त्याग और शौर्य पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
फिल्म पद्मावत के लेखक का पक्ष
फिल्म पद्मावत के लेखक प्रकाश कपाड़िया ने कहा कि हर दर्शक फिल्म को अपने नजरिए से देखता है लेकिन मेकर्स ने जो दिखाया वह उस समय की परिस्थितियों की उनकी समझ पर आधारित था। उन्होंने बताया कि फिल्म में उस दौर की परिस्थितियों को उसी तरह दिखाने की कोशिश की गई जैसी उन्हें इतिहास में पढ़ने और समझने को मिली।
स्वरा को उस दौर के ऐतिहासिक हालात और राजपूत महिलाओं के साहस और बलिदान की सही समझ नहीं है.
कुंवर अजय तोमर, प्रदेश अध्यक्ष
स्वरा को अपनी भाषा में सुधार करना चाहिए.
कीर्ति राठौड़, महिला विंग अध्यक्ष
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