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रुपया डॉलर के मुकाबले 2 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा

आरबीआई की विदेशी मुद्रा योजना से रुपये को मजबूती मिली है

भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 2 महीने से अधिक समय में सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.27 प्रति डॉलर तक पहुंचा, जिससे एक दिन में रुपये की स्थिति में अच्छी मजबूती देखी गई।
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भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले दो महीने के उच्चतम स्तर 94.27 प्रति डॉलर पर पहुंच गया है, जो आरबीआई की विदेशी मुद्रा बिक्री और FCNR(B) डिपॉजिट योजना के माध्यम से विदेशी मुद्रा भंडार के बढ़ने से संभव हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एक्सचेंज रेट 94 से नीचे बना रहता है तो रुपया और मजबूत होकर 92.50 तक जा सकता है।

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भारतीय रुपया और डॉलर का विनिमय दर
भारतीय रुपया और डॉलर का विनिमय दर / सोशल मीडिया

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भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 2 महीने से अधिक समय में सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.27 प्रति डॉलर तक पहुंचा, जिससे एक दिन में रुपये की स्थिति में अच्छी मजबूती देखी गई।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में करीब 0.74% की मजबूती आई और यह 94.2712 तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में यह मजबूती थोड़ी कम होकर लगभग 0.5% रह गई। अब 94 रुपये का स्तर डॉलर के मुकाबले काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट 94 से नीचे जाता है और वहां बना रहता है, तो निर्यातक अपनी हेजिंग बढ़ा सकते हैं। ऐसी स्थिति में रुपया और मजबूत होकर 92.50 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में बाजार की नजर 94 के स्तर पर बनी रहेगी।

रुपये की मजबूती की एक बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से की गई डॉलर की बिक्री और देश में आया बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार प्रवाह माना जा रहा है। आरबीआई ने कुछ महीने पहले विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट योजना शुरू की थी। 31 अगस्त तक आरबीआई ने कुल 136.37 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्रवासी भारतीयों के जमा पैसों का रहा।

आंकड़ों के मुताबिक, FCNR(B) डिपॉजिट से 127.2 अरब डॉलर आए। इसके अलावा विदेश से ली गई विदेशी मुद्रा उधारी से 5.26 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बारोविंग से 3.89 अरब डॉलर मिले। शुरुआत में इस योजना से सिर्फ 50-60 अरब डॉलर आने का अनुमान था, जिसे बाद में बढ़ाकर 80 अरब डॉलर किया गया था, लेकिन वास्तविक रकम इससे काफी ज्यादा रही।

पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमत और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी जैसे कारणों से रुपये को नुकसान हो रहा था। ऐसे समय में आरबीआई ने बैंकों और अन्य माध्यमों से विदेशी मुद्रा जुटाने की सुविधा दी ताकि देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़े और रुपये को सहारा मिले।

आरबीआई ने NRI से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए FCNR(B) डिपॉजिट को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई। यह एक फिक्स्ड टर्म डिपॉजिट होता है जिसमें NRI अपनी विदेशी कमाई को भारत में विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं। इस खाते की खासियत यह है कि मूलधन और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही वापस मिलते हैं, जिससे NRI को रुपये में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता।

कोटक सिक्योरिटीज के FX एनालिस्ट अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, रुपये को इस समय तीन चीजों से फायदा मिल रहा है। पहला, आरबीआई की योजना से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आई है, जिससे आरबीआई के पास रुपये को संभालने की ज्यादा क्षमता है। दूसरा, भारत की सकल घरेलू उत्पाद के मजबूत आंकड़ों से अर्थव्यवस्था को लेकर बाजार का भरोसा बढ़ा है। तीसरा, बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त पैसा मौजूद है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा मिल रहा है।

आरबीआई की इस योजना के तहत FCNR(B) में नए जमा लेने की सुविधा 31 अगस्त को बंद हो गई, जो तय समय से करीब एक महीने पहले है। इसका मतलब है कि इस सुविधा को उम्मीद से ज्यादा अच्छा रिस्पॉन्स मिला। हालांकि, इस योजना के तहत आरबीआई के साथ विदेशी मुद्रा स्वैप की सुविधा 11 सितंबर तक जारी रहेगी, जबकि एक्सटर्नल कमर्शियल बारोविंग और ओवरसीज फाइनेंस कॉरपोरेशन से जुड़ी सुविधा 31 दिसंबर तक खुली रहेगी।

CareEdge Ratings के मुताबिक, इस योजना के तहत बड़ी रकम आने से बैंकिंग सिस्टम में पैसे की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे बैंकों को आने वाले समय में फंडिंग जुटाने में कुछ राहत मिलेगी।

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Published4 सितंबर 2026, 16:50 IST IST
Last updated4 सितंबर 2026, 16:50 IST IST
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