राजनाथ सिंह ने कहा- रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
भारतीय सशस्त्र बलों को खतरों से निपटने की पूरी आजादी और संसाधन मिले हैं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि 2014 में 40,000 करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन बढ़कर अब लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है और रक्षा निर्यात 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के साथ आधुनिक तकनीकों पर जोर दे रहा है और सशस्त्र बलों को आवश्यक संसाधन और स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
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डिजिटल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 से पहले करीब 40,000 करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन अब लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धि
राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2014 से पहले यह करीब 40,000 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। रक्षा क्षेत्र में 16,000 से अधिक एमएसएमई और 2,000 से अधिक स्टार्टअप जुड़े हैं।
सशस्त्र बलों को मिली स्वतंत्रता
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को खतरों का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी स्वतंत्रता और संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर में प्रगति और सुरक्षा चुनौतियां
सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और युवाओं के लिए नए अवसर खुले हैं। उन्होंने बताया कि दुश्मनों ने जम्मू-कश्मीर में युवाओं को गुमराह करने, आतंकवाद फैलाने और देश विरोधी गतिविधियों के जरिए भारत की सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिश की। सरकार ने पुनर्वास, कट्टरपंथ से दूर करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।
रणनीतिक स्वायत्तता और आधुनिक तकनीक
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र निर्णय क्षमता के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अब जमीन, समुद्र, हवा के साथ अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र भी युद्ध के नए मोर्चे बन गए हैं। भारत की रक्षा नीति प्रतिक्रियाशील से सक्रिय बन गई है और स्वदेशी तकनीकों के विकास पर जोर दिया जा रहा है।
शांति और युद्ध पर मंत्री के विचार
सिंह ने कहा, 'भारत शांति में विश्वास करता है, न युद्ध चाहता है और न किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करना उसका उद्देश्य है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'डर के कारण कायम हुई शांति निंदनीय है, जबकि शांति की रक्षा के लिए लड़ा गया युद्ध सम्मान के योग्य है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति और कमजोरी में स्पष्ट अंतर है।
भारतीय सशस्त्र बलों को देश के सामने आने वाले खतरों से निर्णायक तरीके से निपटने की पूरी आजादी और जरूरी संसाधन दिए गए हैं।
राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
यदि कोई देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो उससे बातचीत नहीं होगी और सुरक्षा बल उचित जवाब देंगे।
राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- रक्षा उत्पादन में वृद्धि कैसे संभव हुई?
- रक्षा उत्पादन में वृद्धि के पीछे स्वदेशी तकनीकों के विकास और MSME और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाना शामिल है।
- जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
- सरकार ने पुनर्वास, कट्टरपंथ से दूर करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उपायों पर काम किया है।
- भारत की रक्षा नीति में अब कौन-कौन से नए क्षेत्र शामिल हुए हैं?
- अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र को युद्ध के नए मोर्चे के रूप में शामिल किया गया है।
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