तमिल को मद्रास हाईकोर्ट की प्रमुख भाषा बनाने का प्रस्ताव विधानसभा में
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय आज विधानसभा में केंद्र से अनुमति की मांग करेंगे
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया है जिसमें मद्रास हाईकोर्ट में तमिल को प्रमुख भाषा के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव का मकसद न्यायिक प्रक्रिया में आम जनता की पहुंच बढ़ाना है, और इसे तकनीकी साधनों तथा कानूनी अनुवाद की सुविधाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय आज विधानसभा में मद्रास हाईकोर्ट में तमिल भाषा को प्रमुख भाषा के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव पेश करेंगे। इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अदालत की कार्यवाही में तमिल के इस्तेमाल की अनुमति देने का आग्रह किया जाएगा। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है।
तमिलनाडु विधानसभा में पेश किए जाने वाले इस प्रस्ताव में तकनीक, कानूनी तमिल और अनुवाद की आधुनिक सुविधाओं को आधार बनाकर केंद्र से पुराने रुख पर पुनर्विचार की अपील की जाएगी। सरकार का तर्क है कि तमिल केवल राज्य की आधिकारिक भाषा ही नहीं, बल्कि भारत की शास्त्रीय भाषाओं में भी शामिल है। पिछले वर्षों में तमिल में कानूनी शब्दावली विकसित हुई है, जिससे न्यायिक सामग्री क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध कराना संभव हो गया है।
ई-कोर्ट, डिजिटल कानूनी डेटाबेस, मशीन आधारित अनुवाद और अन्य तकनीकी साधनों ने क्षेत्रीय भाषाओं में न्यायिक सामग्री उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। तमिल को हाईकोर्ट की भाषा बनाने की कोशिश नई नहीं है। 6 दिसंबर 2006 को तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन रुख के कारण यह आगे नहीं बढ़ सका।
संविधान के अनुच्छेद 348 के तहत हाईकोर्ट की कार्यवाही में अंग्रेजी का प्रावधान है, जबकि किसी राज्य की आधिकारिक भाषा के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है। इसलिए तमिलनाडु सरकार की मांग में केंद्र की भूमिका अहम हो जाती है। राज्य के अधीनस्थ अदालतों में तमिल के इस्तेमाल का कानूनी आधार पहले से मौजूद है। आधिकारिक भाषा कानून में निचली सिविल और आपराधिक अदालतों में तमिल में साक्ष्य दर्ज करने और फैसले लिखने के प्रावधान हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती सटीक कानूनी अनुवाद और एक समान शब्दावली की रही है। 2023 में भी मद्रास हाईकोर्ट ने कानून की किताबों और फैसलों के बेहतर तमिल अनुवाद तथा मजबूत कानूनी शब्दकोश की जरूरत पर जोर दिया था। अब यह देखना होगा कि विधानसभा का यह प्रस्ताव केंद्र तक पहुंचने के बाद क्या नया रास्ता खोलता है और क्या तमिल को मद्रास हाईकोर्ट में व्यापक न्यायिक इस्तेमाल की मंजूरी मिल पाती है।
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