हाइड्रोजन ट्रेन की रफ्तार बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घंटे करने की तैयारी
18,500 करोड़ रुपये की परियोजना में तकनीकी सुधार और विस्तार पर काम जारी
रेलवे बोर्ड देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की परिचालन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, जिसका संचालन अभी हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होता है। इस परियोजना को चार से पांच साल में 18,500 करोड़ रुपये की लागत से पूरा करने का लक्ष्य है। हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल है और इसके संचालन के लिए ओवरहेड बिजली तारों की आवश्यकता नहीं होती।
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रेलवे बोर्ड ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की परिचालन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाने का प्रयास शुरू किया है। 18,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को चार से पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि रेलवे को इस साल 11 और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मिलने की उम्मीद है। उज्जैन में 2028 में लगने वाले सिंहस्थ मेले के लिए 100 से 125 विशेष ट्रेन चलाने की योजना बनाई जा रही है और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
रेलगाड़ियों में चूहों की समस्या के निदान के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं और व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि रेलवे गाड़ियों और स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरा के साथ कृत्रिम मेधा (एआई) को जोड़ा जा रहा है।
हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे मार्ग पर संचालित हाइड्रोजन ट्रेन को 17 जुलाई को प्रधानमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। अभी तक इसकी अधिकतम परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है।
रेलवे बोर्ड के अनुसार, इस ट्रेन की रफ्तार जल्द ही दोगुनी होकर 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाई जाएगी। इससे ट्रेन को दूरी कम समय में पूरी करने में मदद मिलेगी और देश के अन्य रूटों पर भी इसे चलाना आसान होगा।
हाइड्रोजन ट्रेन के अंदर लगे एडवांस फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के कैमिकल रिएक्शन से बिजली पैदा करते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है और इसके संचालन के लिए ओवरहेड बिजली तारों की आवश्यकता नहीं पड़ती।
रेलवे बोर्ड ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम चार से पांच साल में पूरा किया जाएगा, जिसकी लागत 18,500 करोड़ रुपये है।
हाइड्रोजन ट्रेन को देश के अन्य रेल खंडों में पर चलाने के लिए सभी हितधारकों से चर्चा की जा रही है और इस सिलसिले में तकनीकी पहलुओं और ईंधन की आपूर्ति की व्यवस्थाओं को भी परखा जा रहा है ताकि ट्रेन की रफ्तार बढ़ाई जा सके
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष
देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन हावड़ा और कामाख्या के बीच चलाई जा रही है, जबकि ऐसी चार और ट्रेन बनकर आ चुकी हैं तथा आने वाले दिनों में उनका विधिवत उद्घाटन होना है
सीईओ सतीश कुमार
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हाइड्रोजन ट्रेन किस मार्ग पर संचालित हो रही है?
- यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे मार्ग पर चलती है।
- हाइड्रोजन ट्रेन के ईंधन का क्या विशेष महत्व है?
- इस ट्रेन में एडवांस फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की कैमिकल रिएक्शन से बिजली बनाते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।
- वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कब और कितनी मिलेगी?
- रेलवे को इस साल 11 और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मिलने की उम्मीद है।
- रेलवे सुरक्षा को कैसे बढ़ाया जा रहा है?
- सीसीटीवी कैमरा और कृत्रिम मेधा (एआई) तकनीक को जोड़कर गाड़ियों और स्टेशनों की सुरक्षा बेहतर की जा रही है।
- परियोजना पूरी होने में कितना समय लगेगा?
- यह महत्वपूर्ण परियोजना चार से पांच साल में पूरी होने की योजना है।
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