राजनीतिक साख पर परीक्षा: झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव में भाजपा-कांग्रेस की टक्कर
सांसद और विधायक की संगठनात्मक ताकत पर चुनाव परिणाम का असर होगा
झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है, जिसमें कई असंतुष्ट नेता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं। यह चुनाव भाजपा विधायक राजेन्द्र भाम्बू और कांग्रेस सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला की राजनीतिक साख के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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झुंझुनूं। झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव में सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला और विधायक राजेन्द्र भाम्बू की राजनीतिक साख दांव पर है। 60 वार्डों में चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिसमें भाजपा और कांग्रेस के कई असंतुष्ट नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
झुंझुनूं नगर परिषद में फिलहाल कांग्रेस का बोर्ड है, जिसे बरकरार रखने की चुनौती है। भाजपा इस बार सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है और 60 वार्डों में से 41 में अपने अधिकृत प्रत्याशी उतारे हैं। भाजपा के टिकट वितरण की पूरी कमान विधायक राजेन्द्र भाम्बू के हाथों में रही, जिनकी राय से अधिकांश वार्डों में प्रत्याशी चुने गए।
टिकट वितरण के दौरान भाजपा में असंतोष भी सामने आया है। कई वार्डों में कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है, खासकर विधायक के दामाद मनु धनखड़ को टिकट दिए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. कमल सैनी टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं और बगावती तेवर दिखा रहे हैं। इससे भाजपा को बागियों से होने वाले नुकसान पर नजर रखनी होगी।
कांग्रेस में सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला की भूमिका चुनावी रणनीति और टिकट वितरण में अहम मानी जा रही है। यदि कांग्रेस दोबारा बहुमत हासिल करती है तो इसे ओला के नेतृत्व की सफलता माना जाएगा, जबकि कमजोर प्रदर्शन पर पार्टी के भीतर सवाल उठ सकते हैं।
कई वार्डों में कांग्रेस को भी बगावत का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व नगर पालिका चेयरमैन तैयब अली को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है, लेकिन उनके सामने जिला प्रवक्ता शहबाज फारूकी और पूर्व पार्षद आजम भाटी की पुत्रवधु निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। वार्ड 37 में कांग्रेस के पूर्व पार्षद मुराद अली को टिकट मिला है, जबकि पूर्व पार्षद रियाज अली निर्दलीय हैं। इससे कांग्रेस का वोट बैंक बंटने की आशंका है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि निर्दलीय प्रत्याशी कई सीटों पर जीत-हार का गणित बदल सकते हैं। यह चुनाव स्थानीय निकाय से आगे बढ़कर जिले की आगामी राजनीतिक दिशा तय करेगा। भाजपा के लिए यह विधायक राजेन्द्र भाम्बू के नेतृत्व की परीक्षा है, जबकि कांग्रेस के लिए सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला की संगठनात्मक ताकत का आकलन होगा।
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