सांसद सीपी जोशी ने विवादित बयान पर जताया आक्रोश
चित्तौड़गढ़ में महारानी पद्मिनी और वीरांगनाओं के जौहर को लेकर तीखी प्रतिक्रिया
चित्तौड़गढ़। सांसद सीपी जोशी ने चित्तौड़गढ़ में महारानी पद्मिनी और रानी फूल कंवर के साथ 16 हजार वीरांगनाओं के जौहर को लेकर दिए गए विवादित बयान पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इसे देश की संस्कृति और इतिहास का अपमान बताया। इस पर मेवाड़ के सर्व समाज ने ज्ञापन सौंपकर विरोध प्रकट किया।
अध्यक्ष नारायण सिंह ने कहा कि महारानी पद्मिनी व रानी फूल कंवर के साथ 16 हजार वीरांगनाओं का जौहर केवल एक समाज का नहीं, बल्कि छत्तीस कौम का आत्मोत्सर्ग था। उपाध्यक्ष निर्मला कंवर ने बताया कि जौहर अंतिम विकल्प और युद्ध से भी बड़ा बलिदान था ताकि आक्रांता उनकी देह को भी न छू सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि "एसी कमरों में बैठकर चित्तौड़ की वीरभूमि के इतिहास पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना शर्मनाक है।" सीपी जोशी ने चित्तौड़ दुर्ग को नारी शक्ति के त्याग का प्रतीक बताते हुए कहा कि "तीन-तीन जौहर की अमर गाथाओं का साक्षी यह स्थान है।"
मेवाड़ के सर्व समाज ने इस विवादित बयान को स्वीकार्य नहीं बताया और कहा कि वीरांगनाओं के इस अपमान को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान भूपाल शिक्षा समिति के अध्यक्ष नरपत सिंह भाटी, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा जिलाध्यक्ष सहदेव सिंह, भंवर सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, आदित्य सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि जब सर्वस्व दांव पर लगा था, तब मुगलों व आक्रांताओं से अपने स्वाभिमान और संस्कृति की रक्षा के लिए वीरांगनाओं ने हंसते-हंसते अग्नि स्नान किया था। आक्रमणकारियों के समक्ष महिलाओं के सम्मान और अस्मिता की रक्षा के लिए यह जौहर कायरता नहीं, बल्कि स्वाभिमान का सर्वोच्च बलिदान था।
सर्व समाज ने मांग की है कि विवादित बयान देने वाले व्यक्ति को तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में ऐसी बयानबाजी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुर्खियां बटोरने के लिए वीरांगनाओं के बलिदान का अपमान करने वाली प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस दिमागी नक्सली सोच को लेकर देश को आगाह किया है, यह बयान उसी मानसिकता का प्रत्यक्ष प्रमाण है
सीपी जोशी, सांसद
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