कोटपूतली में मानसून की कमी से खरीफ फसलों को खतरा
अगस्त में पांच इंच से कम बारिश, तेज धूप और उमस से फसलें सूखने लगीं
कोटपूतली क्षेत्र में मानसून की कमी से खरीफ फसलों को गंभीर खतरा है, अगस्त में कम बारिश और तेज धूप के कारण फसलें सूखने लगी हैं। कृषि उपनिदेशक ने सूखा प्रबंधन के लिए पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव और फव्वारा विधि से सिंचाई की सलाह दी है, जबकि किसान अच्छी बारिश की आस में हैं।
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कोटपूतली। कोटपूतली क्षेत्र में मानसून की कमी से खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। अगस्त में पांच इंच से कम बारिश और लगातार तेज धूप-उमस ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि फसलें बच सकें।
कोटपूतली क्षेत्र डार्क जोन में आने के कारण अधिकांश भूजल स्रोत सूख चुके हैं। यहां के किसान पूरी तरह मानसून की बारिश पर निर्भर हैं, लेकिन इस बार बारिश कम होने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। बारिश में और देरी होने पर फसलों को नुकसान बढ़ने का खतरा है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. रामजी लाल यादव ने बताया कि सूखे के असर को कम करने के लिए किसान 1 से 1.5 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "पानी की कमी होने पर खेत में खुला पानी देने के बजाय फव्वारा विधि से सिंचाई करना बेहतर रहेगा। इससे कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई हो सकेगी और पौधों को सूखे से निपटने में मदद मिलेगी।"
डॉ. यादव ने किसानों को खेतों में उगी बेकार घास-फूस को तुरंत हटाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खरपतवार हटाने से फसल के पौधों को उपलब्ध नमी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा कम होगी। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा जैसे कुआं या ट्यूबवेल है, वे फसल को तुरंत हल्की सिंचाई दें।
किसानों का कहना है कि अगर अब अच्छी बारिश हो जाती है तो सूखने के कगार पर पहुंच चुकी खरीफ की फसलों को नया जीवन मिल सकता है।
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