महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने 38 साल पुराने शेयर ट्रांसफर मामले में टाटा ट्रस्ट्स को राहत दी
2 सितंबर 2026 के आदेश में ट्रांजैक्शन को कानून के अनुसार मान्यता मिली, जांच बंद
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने एक पुराने मामले में टाटा ट्रस्ट्स को राहत दी, जिसमें 1989 का शेयर ट्रांसफर शामिल था। चैरिटी कमिश्नर ने माना कि यह ट्रांजैक्शन उस समय के कानूनों के अनुसार था और इसमें सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
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टाटा ट्रस्ट्स को 2 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर का आदेश मिला, जिसमें 1989 के शेयर ट्रांसफर से जुड़ी शिकायत को बंद कर दिया गया। स्टेट चैरिटी कमिश्नर अमोघ कोलीटी ने माना कि यह ट्रांजैक्शन उस समय लागू कानूनों के मुताबिक हुआ था और इसमें जरूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था। इससे तीन दशक पुराने विवाद में टाटा ट्रस्ट्स को बड़ी राहत मिली है।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने 2 सितंबर 2026 के अपने आदेश में कहा कि 1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से दिवंगत उद्योगपति नवल टाटा को टाटा संस के 833 शेयर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी। कमिश्नर ने माना कि यह ट्रांजैक्शन उस समय लागू कानूनों के अनुसार हुआ और इसमें सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने 10 जून 2026 को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। जांच में पाया गया कि नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट ने शेयर बेचने का फैसला अचानक नहीं लिया था, बल्कि यह 1984 से विचाराधीन था।
इस फैसले के पीछे आयकर अधिनियम में बदलाव था, जिससे चैरिटेबल ट्रस्ट के पास मौजूद कुछ सिक्योरिटीज के टैक्स छूट पर असर पड़ सकता था। नवंबर 1988 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट को नेशनल ट्रस्ट के तौर पर मान्यता देने से इनकार कर दिया था, जिससे टैक्स दायित्व का खतरा बढ़ गया।
कमिश्नर ने यह भी माना कि नवल टाटा ने 1 जनवरी 1988 को ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया था और बाद में यह बदलाव चैरिटी कमिश्नर को रिपोर्ट किया गया। कानूनी सलाह मशविरा वकील नानी ए पालकीवाला से लिया गया था।
दिसंबर 1988 में नवल टाटा को ट्रस्टी पद से हटाकर उनके शेयर खरीदने का विकल्प इस्तेमाल किया गया। इस ट्रांजैक्शन में 833 शेयर का मूल्य ₹1,914 प्रति शेयर तय हुआ। 18 जनवरी 1989 को ₹15.94 लाख में यह ट्रांजैक्शन पूरा हुआ। टाटा ट्रस्ट्स की बैलेंस शीट में इस बिक्री से ₹8.15 लाख का लाभ दिखाया गया।
टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में टाटा ट्रस्ट्स की 66% हिस्सेदारी है। यह संस्था 130 से अधिक वर्षों से देश की सेवा कर रही है और जन-विश्वास, जवाबदेही तथा नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखती है।
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि शेयर ट्रांसफर से जुड़े आरोप बेबुनियाद, बिना किसी सबूत के और गलत नीयत से लगाए गए थे। इस बात की पुष्टि हो गई है।
यह राहत ऐसे समय में मिली है जब टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अचानक हटने के बाद नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। नोएल टाटा के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण साबित हुआ है क्योंकि वे ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं।
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