ISRO ने लॉन्च किया पहला जियोसिंक्रोनस अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05
36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से भारत और सीमाओं पर रखेगा नजर
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर 2025 को EOS-05, भारत का पहला जियोसिंक्रोनस अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट, GSLV-F17 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह उपग्रह भारत के बड़े हिस्से और सीमा क्षेत्रों की निगरानी करेगा तथा हर 30 मिनट में हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें भेजेगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं और रणनीतिक निगरानी में मदद मिलेगी।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर 2025 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह भारत का पहला जियोसिंक्रोनस अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है, जो 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से देश के बड़े हिस्से और सीमा क्षेत्रों की निगरानी करेगा।
GSLV-F17 की यह 19वीं उड़ान थी, जिसे सेकेंड लॉन्च पैड से उड़ाया गया। EOS-05 सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। इस मिशन में चार मीटर व्यास वाला ओजीव कंपोजिट पेलोड फेयरिंग इस्तेमाल हुआ।
EOS-05 को 'बाज' या 'अनब्लिंकिंग आंख' कहा जा रहा है। यह उपग्रह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहेगा, जहां यह पृथ्वी के घूमने की गति के साथ घूमेगा और भारत पर लगातार नजर बनाए रखेगा। ISRO के अनुसार, यह सैटेलाइट हर 30 मिनट में पूरे भारत की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीर भेजेगा, जबकि सीमा क्षेत्रों जैसे पाकिस्तान-चीन बॉर्डर पर हर 5 मिनट में भी तस्वीर ले सकेगा।
इस तरह की कक्षा से बड़े क्षेत्र की बार-बार इमेजिंग संभव होती है, जो पारंपरिक लो-अर्थ ऑर्बिट वाले उपग्रहों से अलग क्षमता है। इससे पृथ्वी अवलोकन, मौसम की निगरानी, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक सीमा निगरानी में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
EOS-05 से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं, पर्यावरणीय बदलावों और मौसम संबंधी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा। यह उपग्रह बाढ़, चक्रवात और अन्य घटनाओं की निगरानी में भी सहायक होगा।
ISRO ने यह मिशन पिछले पांच वर्षों में हुए दो असफल लॉन्च के बाद किया है। जनवरी 2026 और मार्च 2025 में हुए दो मिशन क्रायोजेनिक स्टेज और तीसरे चरण में तकनीकी समस्याओं के कारण सफल नहीं हो सके थे।
GSLV-F17 रॉकेट ने इस बार मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो ISRO के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी।
इसरो के विशेषज्ञों के अनुसार, EOS-05 उपग्रह की यह क्षमता भारत के लिए एक बड़ी छलांग है, जो देश की सुरक्षा और पर्यावरणीय निगरानी को बेहतर बनाएगी।
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