थुंबा से शुरू हुआ भारत का अंतरिक्ष सफर, अब चांद तक पहुंचने की तैयारी
विक्रम साराभाई ने 1962 में थुंबा में स्थापित किया था रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 1962 में थुंबा के चर्च से हुई थी, जहां से हर महीने साउंडिंग राकेट का प्रक्षेपण होता रहा है। वर्तमान में यहां गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष में मानव भेजने की तैयारी चल रही है और भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की योजना भी है।
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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 1962 में थुंबा के चर्च से हुई थी, जहां डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन की स्थापना की। यह स्थल पृथ्वी के चुंबकीय भूमध्य रेखा पर स्थित है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए उपयुक्त माना जाता है।
थुंबा धरती का मैगनेटिक इक्वेटर होने के कारण मिसाइल प्रक्षेपण के लिए आदर्श स्थल है। यहां से हर महीने के तीसरे बुधवार को एक मिसाइल का प्रक्षेपण होता है। कार्यक्रम की शुरुआत सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च से हुई थी, जिसे स्थानीय मछुआरा समुदाय ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराया था। यह चर्च आज भी वैसा ही बना हुआ है।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अबूल कलाम ने इसी चर्च की इमारत में कई मिसाइल निर्माण योजनाएं तैयार की थीं। थुंबा आज भी नियमित रूप से साउंडिंग राकेट प्रक्षेपण और वैज्ञानिक गतिविधियों का केंद्र है।
चर्च में स्थित स्पेस म्यूजियम में उपग्रह प्रणालियों, प्रक्षेपण यानों और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यशील मॉडल और प्रदर्शन रखे गए हैं, जो भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।
थुंबा केंद्र पर विशेष रूप से गगनयान मिशन का प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसका उद्देश्य मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित करना है। इसके अलावा भारत की दीर्घकालिक योजनाओं में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के महत्वाकांक्षी लक्ष्य शामिल हैं।
भारत की अंतरिक्ष दृष्टि-2047 के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की तैयारी भी की जा रही है। यह यात्रा थुंबा में शुरू हुई भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विनम्र शुरुआत से लेकर आज की उन्नत क्षमताओं और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं तक के विकास को दर्शाती है।
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