हिमाचल हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर कलेक्टर को 23 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया
पुनर्वास आदेश की अनुपालना से जुड़ी याचिका में कलेक्टर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर को 23 सितंबर 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है, जो पुनर्वास से जुड़े आदेश की अनुपालना से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख पर कलेक्टर की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है और अनुपस्थिति पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्थान के श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर को 23 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह निर्देश पुनर्वास से जुड़े आदेश की अनुपालना से संबंधित निष्पादन याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया गया। अदालत ने इस सुनवाई में कलेक्टर को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी, लेकिन अगली तारीख पर उपस्थिति अनिवार्य कर दी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टर को हर हाल में 23 सितंबर को अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। यदि वे उपस्थित नहीं होते हैं तो सख्त दंडात्मक या बलपूर्वक कदम उठाए जा सकते हैं।
आवेदन में बताया गया कि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा हो चुकी है और नामांकन पत्रों की जांच चल रही है, जिससे कलेक्टर की प्रशासनिक व्यस्तताएं बढ़ गई हैं। इस कारण मौजूदा सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दी गई है।
यह मामला हाईकोर्ट के पूर्व आदेश की अनुपालना से जुड़ी निष्पादन याचिका के रूप में अदालत के सामने आया है। पुनर्वास से संबंधित आदेश के पालन को लेकर कार्यवाही जारी है। जुलाई 2026 में संसद के मानसून सत्र के चलते भी कलेक्टर को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी गई थी।
अगली सुनवाई में कलेक्टर को अदालत में उपस्थित रहकर आदेश की अनुपालना से जुड़े मामले में स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अदालत ने इस बात पर कोई नरमी नहीं दिखाई है और कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है।
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