बाड़मेर में क्षत्रिय युवक संघ के शिविर का विदाई कार्यक्रम संपन्न
चार दिन चले प्रशिक्षण शिविर में 122 समाजबंधुओं ने लिया हिस्सा
बाड़मेर के जवाहर राजपूत छात्रावास संस्थान में क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ, जिसमें करीब 122 प्रतिभागियों ने अनुशासन, संगठन, धर्म, इतिहास, समाज सेवा आदि विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया। समापन समारोह में सभी ने संघ के प्रति समर्पण का संकल्प लिया और नियमित शाखा में शामिल होने की सलाह दी गई।
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बाड़मेर। बाड़मेर के जवाहर राजपूत छात्रावास संस्थान में क्षत्रिय युवक संघ के चार दिवसीय प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर का विदाई कार्यक्रम 7 सितंबर को आयोजित हुआ। करीब 122 समाजबंधुओं ने शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त किया और संघ के उद्देश्य को समझकर समर्पण का संकल्प लिया।
शिविर में अनुशासन, संगठन, क्षत्रिय धर्म, संस्कार, इतिहास, महापुरुषों के जीवन, समाज सेवा, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और स्वावलंबन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। चार दिन तक कृत्रिम वातावरण में क्षत्रिय धर्म पालन का माहौल बनाया गया, लेकिन बाहरी वातावरण व्यवहार के प्रतिकूल होने के कारण शिविर से मिली सीख को निरंतर स्मरण रखना आवश्यक बताया गया।
प्रमुख मूलसिंह चांदेसरा ने कहा, "संसार में आपाधापी का मुख्य कारण कर्तव्य-विमुखता है।" उन्होंने बताया कि जीवन का कोई निश्चित उद्देश्य होना चाहिए, अन्यथा जीना और मरना एक समान है। उन्होंने कहा कि पूज्य तनसिंह सहित अन्य महापुरुषों के जीवन का उद्देश्य भी क्षत्रिय धर्म का पालन रहा।
शिविर में मिली प्रेरणा को जीवन में बनाए रखने के लिए नियमित शाखा में जाने की सलाह दी गई। समापन समारोह में सभी शिविरार्थियों ने संघ के प्रति समर्पण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मोतीसिंह हड़मत नगर, नखतसिंह, मनोहरसिंह, जसवंतसिंह, जालमसिंह, मेराजसिंह, गुलाबसिंह कालेवा, गुमानसिंह, हरिसिंह वेदरलाई, श्रवणसिंह केशरपुरा, भोजराजसिंह सोहड़ा, देवीसिंह औकातिया बेरा, बालोतरा संभाग प्रमुख मूलसिंह काठाड़ी, बालोतरा प्रांत प्रमुख गोविंदसिंह गुगड़ी, वीरमसिंह थोब, राणासिंह टापरा, दौलतसिंह मुंगेरिया, सोहनसिंह कालेवा सहित आसपास के गांवों के समाजबंधु मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- शिविर में किन विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया?
- शिविर में नशामुक्ति और स्वावलंबन सहित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक विषयों पर शिक्षाएं दी गईं।
- शिविर में सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या था?
- कर्तव्य-विमुखता को संसार की आपाधापी का मुख्य कारण बताया गया।
- क्या शिविर के बाद कोई निरंतर गतिविधि सुझाई गई?
- संघ के प्रति समर्पण बनाए रखने के लिए नियमित शाखा में जाने की सलाह दी गई।
- कार्यक्रम में कौन-कौन से समाजबंधु उपस्थित थे?
- बालोतरा संभाग और प्रांत के प्रमुखों सहित आसपास के कई गांवों के समाजबंधु शामिल हुए।
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