हिमालय में जलवायु परिवर्तन से बाढ़ का खतरा बढ़ा
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, प्रशासन ने राहत शिविर लगाए
हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के चलते बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन में वृद्धि हो रही है। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और प्रशासन ने तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन हिंदूकुश हिमालय में आपदाओं को बढ़ावा दे रहा है और इससे लोग एक आपदा से उबर नहीं पाते कि दूसरी आपदा आ जाती है।
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जागरण संवाददाता। हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञ शाश्वत सान्याल ने कहा कि हिंदूकुश हिमालय में जलवायु परिवर्तन बड़ी भूमिका निभा रहा है और इस तरह की जटिल आपदाओं को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि नेपाल के लोग पिछली बाढ़ से अभी उबर ही रहे थे कि अगली आपदा आ गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि लोगों को एक आपदा के बाद दूसरी आपदा से उबरने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे नदियों का स्वरूप भयावह तरीके से बदल रहा है। इससे चट्टानें खिसकने, हिमस्खलन और बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। हिमस्खलन से नदी का रास्ता रुक सकता है और बाद में अचानक बाढ़ आ सकती है। यह स्थिति निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों और निवेश पर असर डाल रही है।
गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। कछला गंगा घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से सात सेंटीमीटर ऊपर है। पटियाली तहसील क्षेत्र के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फिर पहुंचने लगा है, जिससे ग्रामीणों के आवागमन और पशुओं के चारे की समस्या बढ़ गई है। प्रशासन और सिंचाई विभाग ने तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।
अधिशासी अभियंता ने बताया कि पानी कम होने के बाद राहत शिविरों को व्यवस्थित किया जाएगा। विभाग की टीमें तटबंधों और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी कर रही हैं। ग्रामीणों को नदी के किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव के उपाय किए जाएंगे।
26 अगस्त को 6.7 लाख लोगों को मोबाइल संदेश भेजे गए थे, लेकिन कुछ पर्यटक या प्रवासी कामगार नेपाली भाषा नहीं समझते थे, जबकि कुछ लोगों ने खतरे को गंभीरता से नहीं लिया। पानी बढ़ने पर लोग अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ी की ओर भागे।
हिमालय क्षेत्र में 2013 की केदारनाथ बाढ़, 2021 की चमोली आपदा, 2023 में दक्षिण ल्होनक झील के फटने से आई बाढ़ और अन्य घटनाओं में हजारों लोगों की जान गई और सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। यह क्षेत्र दुनिया के कई हिस्सों की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन की रफ्तार बढ़ रही है और समुदायों के टिकने पर चिंता बढ़ रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर लगाए गए हैं
तहसीलदार
पानी कम होने के बाद इन्हें व्यवस्थित कराया जाएगा
अधिशासी अभियंता
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