बाड़मेर में भाजपा-आरएलपी कार्यकर्ताओं के बीच नामांकन वापसी को लेकर झड़प
वार्ड 43 के प्रत्याशी के नामांकन वापसी के बाद एसडीएम कार्यालय के बाहर तनावपूर्ण माहौल
बाड़मेर में वार्ड 43 के आरएलपी प्रत्याशी के नामांकन वापसी के बाद एसडीएम कार्यालय के बाहर भाजपा और आरएलपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप और धक्का-मुक्की की स्थिति देखी गई। आरएलपी ने भाजपा पर प्रत्याशी धर्माराम का अपहरण कर दबाव डालने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इस आरोप का खंडन करते हुए इसे आरएलपी की योजना बताया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
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बाड़मेर। बाड़मेर में वार्ड 43 के आरएलपी प्रत्याशी के नामांकन वापसी के बाद एसडीएम कार्यालय के बाहर भाजपा और आरएलपी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और धक्का-मुक्की के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
वार्ड 43 के आरएलपी प्रत्याशी ने अपनी इच्छा से एसडीएम कोर्ट में पेश होकर नामांकन वापस लिया। इस प्रक्रिया के दौरान एसडीएम कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में भाजपा और आरएलपी के कार्यकर्ता जमा हो गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई और काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
आरएलपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा के सैकड़ों लोगों ने जबरदस्ती उनके प्रत्याशी धर्माराम का अपहरण किया और दबाव बनाकर नामांकन वापस लेने को मजबूर किया। भाजपा नेता स्वरूपसिंह खारा ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि आरएलपी के लोग एसडीएम ऑफिस से जबरदस्ती प्रत्याशी उठाकर ले जाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रत्याशी ने अपनी मर्जी से नामांकन वापस लिया।
लक्ष्मण सिंह गोदारा ने कहा कि प्रत्याशी मजबूत और टिकाऊ होने चाहिए ताकि ऐसी स्थिति न बने। उन्होंने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की।
पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
राजस्थान में निकाय चुनाव 2026 के लिए नामांकन वापसी की प्रक्रिया अहम होती है क्योंकि इसके बाद कई वार्डों में चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ हो जाती है। वार्ड 43 के प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने से चुनावी समीकरण बदलने के आसार हैं।
इस मामले में भाजपा और प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। दोनों पक्षों की बात आने के बाद ही नामांकन वापसी के पीछे की असल वजह स्पष्ट हो पाएगी।
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