निकाय चुनाव में सवर्ण समाज की नाराजगी से बीजेपी-कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं
टिकट वितरण में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा और यूजीसी एक्ट को लेकर विरोध तेज़
राजस्थान के निकाय चुनावों से पहले सवर्ण समाज की नाराजगी भाजपा और कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गई है। टिकट वितरण और यूजीसी एक्ट से जुड़ी मांगों पर विरोध प्रदर्शन के बीच, बीकानेर, डूंगरपुर और हिंडौली में कुछ प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि कई स्थानों पर नामांकन पत्रों के खारिज होने के बाद चुनावी मुकाबले बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
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जयपुर। राजस्थान के निकाय चुनाव से पहले सवर्ण समाज की नाराजगी दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गई है। टिकट वितरण में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा और यूजीसी एक्ट से जुड़ी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन और बैठकों के जरिए असंतोष खुलकर सामने आ रहा है।
राजस्थान में निकाय चुनाव के नामांकन-पत्रों की जांच के बाद तीन प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इनमें दो भाजपा के और एक कांग्रेस का पार्षद शामिल है। बीकानेर नगर निगम के वार्ड 69 से भाजपा की लीला गहलोत और डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड 23 से मनन कलासुआ निर्विरोध चुने गए हैं, जबकि बूंदी जिले की हिंडौली नगर पालिका के वार्ड 20 से कांग्रेस के हनुमान व्यास का नामांकन निर्विरोध हुआ है।
डूंगरपुर में कुल 40 वार्डों के 196 नामांकन पत्रों की जांच रिटर्निंग अधिकारी और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी की गई। वार्ड 23 से कांग्रेस प्रत्याशी गणेश कटारा पर आपराधिक मामले दर्ज होने के कारण उनका नामांकन खारिज कर दिया गया। इसके बाद केवल भाजपा के मनन कलासुआ ही मैदान में बचे हैं। मनन कलासुआ पूर्व एवं वर्तमान सभापति अमृत कलासुआ के बेटे हैं।
बीकानेर में भाजपा की लीला गहलोत अकेली प्रत्याशी हैं क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन में त्रुटियां पाई गईं। हिंडौली नगर पालिका के वार्ड 20 से भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र सिंह का नामांकन खारिज हो गया है, जिससे कांग्रेस के हनुमान व्यास ही मैदान में हैं।
प्रदेश में नामांकन-पत्रों की जांच के दौरान हजारों आवेदकों के पर्चे विभिन्न कारणों से रिजेक्ट किए गए हैं, लेकिन कई जगह एक से अधिक प्रत्याशी होने के कारण मतदान होगा।
कांग्रेस ने कई जगह नामांकन में सरकारी स्तर पर धांधली का आरोप लगाया है और कई निकायों में उनके प्रत्याशियों के पास समय पर पार्टी का सिंबल नहीं पहुंचा। इस कारण कांग्रेस ने कई जगह विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।
सवर्ण समाज की नाराजगी टिकट वितरण से लेकर यूजीसी एक्ट, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण में सुधार जैसी मांगों को लेकर बढ़ रही है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में विरोध-प्रदर्शन, बाइक रैलियां और बैठकों के जरिए समाज के लोग दोनों प्रमुख दलों के खिलाफ अपनी असंतोष जाहिर कर रहे हैं।
आबूरोड नगरपालिका चुनाव में ब्राह्मण समाज ने टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए टिकट वितरण की विस्तृत जांच की मांग की और भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी तथा कांग्रेस जिलाध्यक्ष लीलाराम को पद से हटाने की मांग की।
समाज के लोगों का कहना है कि इस मामले में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को भी अवगत कराया जाएगा।
श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने भाजपा और कांग्रेस का बहिष्कार करने का ऐलान किया है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हुई है।
सवर्ण समाज लंबे समय से दोनों दलों का परंपरागत वोटर रहा है, लेकिन अब वह अपने वोट की ताकत का एहसास कराएगा। इस असंतोष का असर निकाय चुनाव में भी दिख सकता है।
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