मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देखी आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’
फिल्म में बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन और उनके संदेश को दर्शाया गया है
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सेंट्रियो मॉल में बाबा नीब करौरी महाराज की भक्ति और सेवा भावना पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारतीय संत परंपरा और आध्यात्मिकता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फिल्म 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई थी और अब तक 72 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर चुकी है।
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सेंट्रियो मॉल के सिनेमा हॉल में बाबा नीब करौरी महाराज की भक्ति और सेवा भावना से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और विधायक प्रदीप बत्रा भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ महान संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भी है। उन्होंने बताया कि भारत की संत परंपरा सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाती रही है। संतों और आध्यात्मिक विभूतियों के जीवन तथा उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले रचनात्मक प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ के माध्यम से बाबा नीब करौरी महाराज की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़े मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया है। इनमें ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, मानव सेवा, करुणा, प्रेम, विनम्रता और लोककल्याण प्रमुख हैं। बाबा नीब करौरी महाराज का कैंची धाम आज विश्वभर में श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है, जिसमें शोभिनव सतैया सहित अन्य कलाकारों ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। यह फिल्म 7 अगस्त 2026 को हिंदी में देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
‘हनुमान अंश’ ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खास पहचान बनाई है। 2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने अब तक 72 करोड़ रुपए का कलेक्शन पार कर लिया है और यह सबसे ज्यादा प्रॉफिट कमाने वाली फिल्मों में शामिल हो गई है।
म्यूजिक कंपोजर साधू तिवारी और गीतकार ऋषि पाठक ने बताया कि फिल्म रिलीज से पहले हनुमान जी के नाम पर 8 बड़े मंगलवार को भंडारे किए गए थे। ऋषि पाठक ने कहा कि वे खुद पत्तल में सब्जी पुरी लेकर मंदिरों के बाहर लोगों को खाना देते थे और इसी दौरान फिल्म का प्रचार करते थे। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने कहा था कि जैसा बाबा कहते थे कि लोगों से प्रेम करो, भूखों को खाना खिलाओ, भक्तों को प्रसाद दो और सीताराम का नाम लो।
फिल्म के पहले और दूसरे हफ्ते में कमाल नहीं हुआ, लेकिन इसके बाद यह सफलता की ओर बढ़ी। साधू तिवारी ने कहा कि यह सिर्फ चमत्कार नहीं बल्कि सच्चाई और ईमानदारी से बनाई गई फिल्म को मिल रहा नतीजा है।
मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माताओं और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा पर आधारित सकारात्मक एवं प्रेरणादायी फिल्में समाज में सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होती हैं।
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