श्रीगंगानगर में बैंक कर्मचारी ने लाखों की धोखाधड़ी की
ग्राहकों के ग्रुप लोन के पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का आरोप
श्रीगंगानगर में एक बैंक कर्मचारी ने ब्रांच मैनेजर की डिजिटल आईडी और पासवर्ड चोरी कर ग्राहकों के ग्रुप लोन के पैसे अपने और परिचितों के खातों में ट्रांसफर किए। पुलिस ने मामले पर जांच शुरू कर दी है और आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
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श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर के एक प्राइवेट बैंक में कार्यरत कर्मचारी पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपी ने ब्रांच मैनेजर की डिजिटल आईडी और पासवर्ड चोरी कर ग्राहकों के ग्रुप लोन के पैसे अपने और परिचितों के खातों में ट्रांसफर किए।
पर्वत सिंह 15 सितंबर 2023 से 6 नवंबर 2025 तक बैंक में ऑपरेशन एग्जीक्यूटिव के पद पर तैनात था। उसका काम ग्राहकों के दस्तावेज़ सत्यापित करना, लोन फाइल प्रोसेस करना और किस्त वसूली करना था।
पुलिस के सामने दी शिकायत में ब्रांच मैनेजर रजत कुमार ने बताया कि आरोपी ने मैनेजर के लॉगिन से पासबुक की डिटेल्स बदल दीं। कई मामलों में उसने असली पासबुक हटाकर नकली या तीसरे पक्ष की पासबुक सिस्टम में अपलोड कर दी और खुद उसे वेरिफाई भी कर दिया।
कुछ मामलों में आरोपी ने अपनी या परिचितों की पासबुक का इस्तेमाल किया। धोखाधड़ी का पता देर से चला क्योंकि उसने कुछ किस्तें अपने पैसे से जमा भी कर दीं।
कंपनी के अधिकारी अभिषेक चौधरी ने आंतरिक जांच की, जिसमें कई ग्राहकों ने बयान दिए कि वे आरोपी के गांव या परिचित हैं। कंपनी ने कई बार गबन की रकम वापस जमा कराने के प्रयास किए, लेकिन आरोपी ने पैसे जमा नहीं करवाए।
जवाहर नगर थाना पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- धोखाधड़ी कैसे पकड़ी गई?
- धोखाधड़ी का पता बाद में चला क्योंकि आरोपी ने कुछ किस्तें खुद जमा करवाईं जिससे संदेह कम हुआ।
- पर्वत सिंह की नौकरी में मुख्य जिम्मेदारियां क्या थीं?
- उनका काम ग्राहकों के दस्तावेज़ सत्यापित करना, लोन फाइल प्रोसेस करना और किस्त वसूली करना था।
- क्या कंपनी ने गबन की रकम वापस करवाने की कोशिश की?
- हाँ, कंपनी कई बार रकम वापस जमा कराने की कोशिश कर चुकी है लेकिन आरोपी ने पैसे जमा नहीं करवाए।
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