अजा एकादशी 2026: व्रत विधि, पारण समय और पूजा का शुभ मुहूर्त
7 सितंबर को मनाई जा रही अजा एकादशी का व्रत जीवन के कष्ट दूर करता है
अजा एकादशी 7 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी के रूप में मनाई जाएगी, जिसका व्रत 6 सितंबर की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम तक रहेगा। इसका पारण 8 सितंबर की सुबह 6:02 से 8:33 के बीच किया जा सकता है। इस व्रत के दौरान भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और इसे जीवन के कष्टों से मुक्ति का जरिया माना जाता है।
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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे अजा एकादशी कहा जाता है, 7 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार यह तिथि 6 सितंबर की शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। इस व्रत को रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 की सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट के बीच किया जा सकता है। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दोपहर 02:42 बजे है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का पालन करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु की विधिपूर्वक आराधना की जाती है।
ज्योति साह, जो धर्म और ज्योतिष विषयों पर चार वर्षों से लेखन कर रही हैं, बताती हैं कि अजा एकादशी के व्रत से जुड़ी सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है ताकि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को बेहतर समझ सकें। उन्होंने वृहद पराशर होरा शास्त्र, अंकज्योतिष, वेद पुराणों का अध्ययन किया है और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम की एस्ट्रो टीम में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं।
ज्योति साह का कहना है कि वे सरल भाषा में ज्योतिषशास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान और अंक ज्योतिष जैसे विषयों को समझाने का प्रयास करती हैं ताकि युवा पीढ़ी भी धर्म कर्म के प्रति भ्रमित न हो। उन्होंने अब तक 3500 से अधिक लेख प्रकाशित किए हैं और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने में लगी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अजा एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?
- इस व्रत को रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- अजा एकादशी के दिन कौन सी पूजा की जाती है?
- पूजा के दौरान भगवान विष्णु की विधिपूर्वक आराधना की जाती है।
- ज्योति साह कौन हैं और उनका योगदान क्या है?
- ज्योति साह धर्म और ज्योतिष विषयों पर चार वर्षों से लेखन कर रही हैं और नवभारतटाइम्स.कॉम में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं।
- ज्योति साह व्रत और धर्म के विषयों को कैसे समझाती हैं?
- वे सरल भाषा में ज्योतिषशास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान और अंक ज्योतिष समझाती हैं ताकि युवा पीढ़ी भ्रमित न हो।
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