नेपाल में बाढ़ के 9 दिन बाद सुरंग से दो मजदूर जिंदा निकाले गए
त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश जारी
नेपाल में बाढ़ के नौ दिन बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग से दो मजदूर सुरक्षित बाहर निकाले गए हैं। बाढ़ में अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है और प्रशासन लापता बच्चों की तलाश में लगा है। भारत ने राहत और बचाव गतिविधियों में सहायता प्रदान की है।
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मंडी। नेपाल में बाढ़ के नौ दिन बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूर सुरक्षित बाहर निकाले गए हैं। रेस्क्यू टीम ने शुक्रवार सुबह दोनों को बचाया, जिससे बचाव अभियान में नई उम्मीद जगी है।
बाढ़ के बाद सुरंग में 42 कर्मचारी और मजदूर फंसे थे। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने तलाशी अभियान तेज किया। आर्मी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत ने दो मजदूरों के बचाए जाने की पुष्टि की।
उनकी पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है। नेपाली सेना ने बताया कि सुबह खोज एवं बचाव अभियान के दौरान सुरंग के अंदर से किसी व्यक्ति की आवाज सुनाई दी थी।
नेपाल में बाढ़ के कारण अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दल ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है। प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और परिजनों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 600 बच्चे अभी भी लापता हैं। रसुवा में लगभग 280 और नुवाकोट में 300 से 350 बच्चे लापता बताए गए हैं। अकेले नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में करीब 250 बच्चे लापता हैं। प्रशासन और स्कूलों से बच्चों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, लेकिन संचार व्यवस्था प्रभावित होने से सटीक संख्या पता लगाना मुश्किल हो रहा है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल ने भारत, चीन या अमेरिका से जलवायु मुआवजे की मांग नहीं की है। उन्होंने भारत की तत्काल राहत और बचाव सहायता के लिए आभार जताया।
अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए 10 मिलियन डॉलर की सहायता दी है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कंपनी के सीईओ जेन्सेन हुआंग को धन्यवाद दिया। वागले के मुताबिक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में अब 10 अरब नेपाली रुपए से अधिक जमा हो चुके हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर इसके असर का मुद्दा उठा सकते हैं। उन्होंने रसुवा में विनाशकारी बाढ़ के बाद महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
भारत ने बाढ़ के बाद 26 अगस्त को पहला राहत विमान भेजा था। इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन, तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरण और डीएनए विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल थी। 2 सितंबर को पांचवां विमान 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां लेकर गया।
भोटेकोशी आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए नेपाल में जलवायु वैज्ञानिक, पर्वतीय विशेषज्ञ और हिमनद विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञ अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक और जलवायु संबंधी कारणों की जांच कर रहे हैं।
नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है और प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में सीधे धनराशि जमा करने की व्यवस्था की गई है।
यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत प्रयासों के लिए भारत के लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है
नवीन श्रीवास्तव, राजदूत
नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने ऑपरेशन तेज किया और सुरंग के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित किया.
राम नेउपाने
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