झुंझुनूं में शुरू हुई 24 कोसी परिक्रमा, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी
शेखावाटी के लोहार्गल धाम में पवित्र सूर्यकुंड से पदयात्रा की शुरुआत
झुंझुनूं के लोहार्गल धाम में 24 कोसी परिक्रमा शुरू हो गई है, जिसमें श्रद्धालु अरावली पर्वतमाला के कई धार्मिक स्थलों से होते हुए पदयात्रा कर रहे हैं। यह परिक्रमा भाद्रपद अमावस्या के दिन सूर्यकुंड में शाही स्नान और मेला के साथ पूर्ण होगी।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
झुंझुनूं। झुंझुनूं के लोहार्गल धाम में शनिवार से 24 कोसी परिक्रमा शुरू हो गई है। यह धार्मिक आयोजन वर्षों पुरानी परंपरा के तहत मनाया जाता है और इसमें श्रद्धालु अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंच रहे हैं। भगवान श्री ठाकुरजी की पालकी की अगवानी के बाद साधु-संत सूर्यकुंड से पदयात्रा को रवाना करेंगे।
खंडेला के चारोड़ा धाम से भगवान श्री ठाकुरजी की मुख्य पालकी बाबा घनश्याम दास के सानिध्य में रवाना हुई। श्रद्धालु और साधु-संत पालकी के साथ धार्मिक यात्रा में शामिल हुए। यह पालकी शनिवार को लोहार्गल धाम पहुंचेगी, जहां परंपरागत रूप से उसका स्वागत किया जाएगा।
लोहार्गल से शुरू होने वाली परिक्रमा किरोड़ी, शाकंभरी, नागकुंड, टपकेश्वर, शोभावती और खोरीकुंड सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों से होकर गुजरती है। अरावली की पहाड़ियों के बीच श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए इन पवित्र स्थानों पर पहुंचते हैं। रास्ते में भजन-कीर्तन और धार्मिक जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
लोहार्गल धाम की धार्मिक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। चारोड़ा धाम के महंत बाबा घनश्याम दास के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव आत्मग्लानि से मुक्ति पाने के लिए विभिन्न तीर्थों की यात्रा कर रहे थे, इसी दौरान वे लोहार्गल पहुंचे। मान्यता है कि यहां सूर्यकुंड में स्नान करने के दौरान उनके लोहे के अस्त्र-शस्त्र गल गए। इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम लोहार्गल पड़ा और इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला पवित्र तीर्थ माना जाने लगा।
अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों के बीच स्थित लोहार्गल प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अनोखा मेल है। यह क्षेत्र सात पवित्र जलधाराओं और अनेक प्राचीन तीर्थस्थलों से जुड़ा हुआ माना जाता है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु सूर्यकुंड में स्नान करने के साथ आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन भी करते हैं।
मान्यता के अनुसार, इस पवित्र क्षेत्र की परिक्रमा करने और कुंड में स्नान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और धार्मिक दृष्टि से इसे विशेष फलदायी माना जाता है। 24 कोसी परिक्रमा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ेगी।
इस धार्मिक आयोजन का मुख्य आकर्षण भाद्रपद अमावस्या के दिन होने वाला मेला और सूर्यकुंड का शाही स्नान रहेगा। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु लोहार्गल पहुंचेंगे। सूर्यकुंड में पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालु परिक्रमा की धार्मिक परंपरा को पूर्ण करेंगे और भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करने की कामना करेंगे।
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद




Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.