யோகி அரசு நான்கு தசீல்தார்கள் மற்றும் ஒரு நாயப் தசீல்தாரை நீக்கம் செய்தது
उत्तर प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा के बाद चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है। राजस्व परिषद ने इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए और मामलों को लटकाने या अनावश्यक देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। समीक्षा में यह भी कहा गया कि जिन अधिकारियों के स्तर पर लगातार मामले लंबित पाए जाएंगे, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की गहन समीक्षा की गई। इसमें न्यायालयवार और अधिकारीवार लंबित मामलों की स्थिति का आकलन किया गया। मामलों को समयबद्ध तरीके से न निपटाने को गंभीरता से लिया गया।
इस कार्रवाई की चपेट में तहसीलदार पवन कुमार सिंह, जो प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील में तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार रहे और वर्तमान में प्रयागराज में तहसीलदार हैं, तहसीलदार अतुल हर्ष, तहसील बलिया, तहसीलदार हरेराम यादव, जो धनघटा में तत्कालीन नायब तहसीलदार रहे और वर्तमान में गोंडा में तहसीलदार हैं, तहसीलदार आनंद ओझा, तहसील खलीलाबाद, संतकबीरनगर, तथा नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह, तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ शामिल हैं।
पांचों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों में मामले लंबित रहे, निस्तारण की गति अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं रही और इसके लिए अधिकारी की क्या जिम्मेदारी बनती है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व न्यायालयों में लंबित मामले आमतौर पर जमीन, नामांतरण और अन्य राजस्व विवादों से जुड़े होते हैं। इनका सीधा संबंध किसानों, जमीन मालिकों और आम लोगों की संपत्ति से होता है। लंबे समय तक मामलों के लंबित रहने से संबंधित परिवारों और उनकी संपत्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सरकार का जोर अब इस बात पर है कि ऐसे मामलों को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए और पात्र लोगों को समय पर न्याय मिले। इससे किसानों और आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों और न्यायालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। राजस्व परिषद ने अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह रहने का संदेश दिया है और लंबित मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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