बारिश कम होने से लौकी की फसल में कीटों का खतरा बढ़ा
किसानों को फसल की नियमित निगरानी और विशेषज्ञ सलाह लेने की सलाह
बारिश के कमजोर पड़ने के कारण लौकी की फसल में कीटों का खतरा बढ़ गया है। उदयपुर कृषि केंद्र और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल की नियमित निगरानी करें, कीटों या रोगों के शुरुआती संकेत मिलने पर विशेषज्ञ से सलाह लें, और सिंचाई एवं सफाई का ध्यान रखें।
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बारिश के कमजोर पड़ने के बाद खेतों में लौकी की फसल पर कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। उदयपुर कृषि केंद्र ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और कीट या रोग के शुरुआती संकेत मिलने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने को कहा है।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि लौकी की फसल में सुबह या शाम के समय पौधों की पत्तियों, नई कोपलों और बेलों को ध्यान से देखना जरूरी है। पत्तियों पर छेद, सफेद या पीले धब्बे या पत्तियां मुड़ने लगना कीट या रोग का संकेत हो सकता है। ऐसे प्रभावित पौधों की पहचान कर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
फसल में फल मक्खी का प्रकोप भी नुकसानदेह हो सकता है। यह कीट छोटे और विकसित हो रहे फलों को नुकसान पहुंचाता है जिससे अंदर से सड़न शुरू हो सकती है और उत्पादन प्रभावित होता है। इसलिए खेत में खराब या सड़े हुए फलों को ज्यादा समय तक नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि उन्हें खेत से बाहर निकालकर नष्ट करना चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि खेत में अनावश्यक खरपतवार और गिरे हुए फलों को जमा नहीं होने देना चाहिए। साफ-सफाई रखने से कीटों के पनपने की संभावना कम होती है। बेलों के बीच पर्याप्त हवा और रोशनी पहुंचाना भी जरूरी है। सिंचाई जरूरत के अनुसार करें और पानी को लंबे समय तक जमा न होने दें।
किसानों को सलाह दी गई है कि बिना जानकारी के किसी भी कीटनाशक का छिड़काव न करें। फसल में कौन-सा कीट है और उसका प्रकोप कितना है, इसके आधार पर ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करें। खासकर जब लौकी तुड़ाई के नजदीक हो, तब दवा के छिड़काव और तुड़ाई के बीच निर्धारित अंतराल का ध्यान रखना जरूरी है।
बारिश कम होने के बाद मौसम में बदलाव के कारण कीटों की गतिविधि बढ़ सकती है। इसलिए किसान केवल फसल तैयार होने का इंतजार न करें, बल्कि लगातार निगरानी करते रहें। शुरुआती स्तर पर कीट की पहचान होने पर नियंत्रण आसान होता है और फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
किसानों से अपील की गई है कि किसी भी समस्या के सामने आने पर नजदीकी कृषि केंद्र या विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही आगे की कार्रवाई करें।
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