एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान पर रोक लगाई
पांच सदस्यीय बेंच ने मंजूरी पर रोक लगाई, संपत्ति ट्रांसफर पर भी पाबंदी
एनसीएलटी की पांच सदस्यीय विशेष बेंच ने सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान पर रोक लगा दी है और उन्हें किसी भी संपत्ति को बेचने या स्थानांतरित करने से रोका गया है। यह विवाद सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े कर्ज की पुनर्भुगतान योजना को लेकर है, जिसमें कई प्रमुख बैंकों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था।
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एक नज़र में
- एनसीएलटी की पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच ने सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान पर रोक लगा दी है।
- बेंच ने सुभाष चंद्रा को किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने से भी प्रतिबंधित किया है।
- रिपेमेंट प्लान में सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर 6.25 करोड़ रुपये देने थे।
- मुख्य कर्जदार कंपनियों की ओर से 1,494 करोड़ रुपये के भुगतान को भी प्रस्ताव में शामिल किया गया था।
- प्रस्ताव का कर्जदाताओं के 80.8% वोटिंग शेयर ने समर्थन किया, लेकिन कई प्रमुख बैंक और एलआईसी हाउसिंग ने इसका विरोध किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान पर क्या निर्णय लिया है?
- एनसीएलटी की पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच ने रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने पर रोक लगा दी है और सुभाष चंद्रा को संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने से रोका गया है।
- रिपेमेंट प्लान में सुभाष चंद्रा की क्या जिम्मेदारी थी?
- उन्हें व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर 6.25 करोड़ रुपये देने थे।
- प्रस्ताव को कितना प्रतिशत कर्जदाता समर्थन मिला था?
- कर्जदाताओं के 80.8% वोटिंग शेयर का इस प्रस्ताव ने समर्थन प्राप्त किया था।
- कौन-कौन से बैंक और कंपनियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया?
- एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, आरबीएल बैंक और यूनियन बैंक ने इसका विरोध किया।
- एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने प्रस्ताव पर क्या टिप्पणी की?
- एलआईसी हाउसिंग ने कहा कि स्वीकार किए गए दावों की रकम करीब 22,006 करोड़ रुपये है, जबकि प्रस्ताव में केवल 6.25 करोड़ रुपये देने की बात कही गई है, इसलिए इसे अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताया।
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एनसीएलटी की पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच ने सुभाष चंद्रा की ओर से पेश रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने पर रोक लगा दी है। बेंच ने कहा कि पहले दिए गए फैसले में स्पष्ट बहुमत नहीं था और सुभाष चंद्रा को किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने से भी रोका गया है।
यह विवाद सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े कर्ज को लेकर है। पिछले सप्ताह न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा ने तीसरे सदस्य के रूप में इस रिपेमेंट प्लान को आईबीसी की धारा 114 के तहत मंजूरी दी थी। पहले दो सदस्यों ने इस मामले में अलग-अलग राय दी थी, जिसके बाद ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष ने निलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था।
प्रस्ताव के तहत सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर 6.25 करोड़ रुपये देने थे, जबकि मुख्य कर्जदार कंपनियों की ओर से अलग से 1,494 करोड़ रुपये का भुगतान होना था। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के 80.8 फीसदी वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था।
हालांकि, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, आरबीएल बैंक और यूनियन बैंक ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि स्वीकार किए गए दावों की रकम करीब 22,006 करोड़ रुपये है, जबकि प्रस्ताव में कर्जदाताओं को सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी के बदले केवल 6.25 करोड़ रुपये देने की बात कही गई है। कंपनी ने इस प्रस्ताव को अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताया था।
इस कारण से सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। यह मामला बाज़ार में 26 दिन से चल रहा है और अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
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