नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी पर पांच दर्शन और 21 तोपों की सलामी
4-5 सितंबर तक दर्शन पास नहीं, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग
नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी पर सुबह 4:45 बजे से पांच अलग-अलग दर्शन शुरू हुए और आधी रात 12 बजे 21 बार तोपों की सलामी दी जाएगी। प्रशासन ने 4 और 5 सितंबर को मनोरथ दर्शन पास जारी नहीं करने का निर्णय लिया है। श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग और वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।
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राजसमंद। राजसमंद के नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है। सुबह 4:45 बजे से पांच अलग-अलग दर्शन शुरू हुए और रात 12 बजे कान्हा के जन्म की खुशी में 21 बार तोपों की सलामी दी जाएगी। प्रशासन ने दर्शन पास जारी नहीं करने का निर्णय लिया है।
मंदिर में सुबह से श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए जा रहे हैं और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। जन्माष्टमी के दिन सुबह 4:45 बजे मंगला (पंचामृत) दर्शन शुरू हुआ। इसके बाद सुबह 8 बजे श्रृंगार दर्शन शुरू हुआ, जो करीब एक घंटे तक चला।
सुबह 7:30 बजे से 11 बजे तक केशरयुक्त दही और छाछ छिड़काव के दर्शन आयोजित किए गए। शाम 7 बजे से उत्थापन दर्शन करीब आधे घंटे तक चले और शाम 7:30 बजे से भोग-आरती का आयोजन हुआ, जो लगभग एक घंटे तक चला। रात 9 बजे भोग-आरती का एक और सत्र प्रस्तावित है।
शाम को रिसाला चौक से शोभायात्रा निकाली जाएगी। जन्माष्टमी की आधी रात 12 बजे रिसाला चौक में दो अलग-अलग तोपों से कान्हा के जन्म की खुशी में 21 बार तोपों की सलामी दी जाएगी।
प्रशासनिक समिति के निर्देश पर 4 और 5 सितंबर को सभी प्रकार के मनोरथ दर्शन पास जारी नहीं किए जाएंगे। इनमें दिनभर के मनोरथ, राजभोग, मंगल-भोग, शयन-भोग, सामग्री, जीन्स भेंट और किसी भी मनोरथ से जुड़े दर्शन पास शामिल हैं। इस दौरान प्रोटोकॉल दर्शन पास भी जारी नहीं होंगे और पास के क्यूआर कोड की जांच करने वाली मशीन भी बंद रहेगी।
जन्माष्टमी और नंदोत्सव के अवसर पर मंदिर में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं। महिलाओं का प्रवेश चौपाटी मंदिर मार्ग से होते हुए श्रीनाथजी मंदिर के प्रतापमाली गेट से होगा। सभी श्रद्धालुओं की मंदिर से निकासी मोतीमहल से की जाएगी।
श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए प्रशासन ने कई जगह पार्किंग की व्यवस्था की है। सेवा-पूजा की परंपरा और विधि-विधान के कारण दर्शन के समय में बदलाव हो सकता है।
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