नागौर के जसनगर और कुचेरा में बछ बारस पर्व श्रद्धा से मनाया गया
महिलाओं ने गाय-बछड़े की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना की
नागौर जिले के जसनगर और कुचेरा गांवों में बछ बारस पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने गाय और बछड़े की पूजा की और परिवार की खुशहाली व संतान की लंबी आयु की कामना की। पर्व के दौरान मंदिरों और घरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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नागौर। नागौर जिले के जसनगर और कुचेरा गांवों में मंगलवार को बछ बारस पर्व परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। महिलाओं ने सुबह नहाने के बाद गाय और बछड़े की पूजा की और परिवार की खुशहाली तथा संतान की लंबी आयु की कामना की। इस दौरान मंदिरों और घरों में धार्मिक माहौल बना रहा।
जसनगर में महिलाओं ने गाय-बछड़े को तिलक लगाया, माला पहनाई और आरती उतारी। परंपरा के अनुसार उन्हें चारा और गुड़ खिलाकर आशीर्वाद लिया गया। कई महिलाएं समूह में बछ बारस की कथा सुनती रहीं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
कुचेरा में भी महिलाएं श्रद्धा और उत्साह के साथ इस पर्व को मनाती दिखीं। उन्होंने रोली, मौली और अक्षत सहित अन्य पूजन सामग्री चढ़ाकर पूजा की। गाय को माता का स्वरूप मानते हुए परिवार और बच्चों के मंगल की कामना की गई। घरों में पारंपरिक पकवान जैसे मोठ बनाए गए। महिलाएं व्रत रखकर और पूजा के साथ पर्व की परंपराओं का पालन करती हैं।
ग्रामीण इलाकों में बछ बारस का यह पर्व संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए खास माना जाता है। इस परंपरा को महिलाएं आज भी जीवित रख रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बछ बारस पर्व क्यों मनाया जाता है?
- यह पर्व संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए मनाया जाता है।
- पर्व के दौरान महिलाएं क्या करती हैं?
- महिलाएं गाय-बछड़े को तिलक लगाती हैं, माला पहनाती हैं और आरती करती हैं।
- कुचेरा में पूजा के लिए क्या सामग्री चढ़ाई जाती है?
- रोली, मौली, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जाती हैं।
- पर्व के समय कौन सा पारंपरिक पकवान बनाया जाता है?
- घर में मोठ नामक पारंपरिक पकवान बनाया जाता है।
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