मिर्जापुर: द मूवी सिनेमाघरों में रिलीज, तीन सीजन के बाद नया सफर
फिल्म में कालीन भैया, गुड्डू और मुन्ना के साथ नए बाहुबली भी शामिल हैं
मिर्जापुर: द मूवी तीन वेब सीजन के बाद सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, जिसमें कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया की कहानी नए बाहुबली बब्बन यादव के साथ आगे बढ़ती है। फिल्म वेब सीरीज से अलग रूप में पेश की गई है और इसमें पूर्वांचल के लहजे में संवाद हैं।
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तीन सफल वेब सीजन के बाद मिर्जापुर: द मूवी अब सिनेमाघरों में आ चुकी है। फिल्म में कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया की कहानी नए बाहुबली के साथ आगे बढ़ती है। निर्माता-निर्देशक ने इसे वेब सीरीज से अलग रखते हुए नया रूप दिया है।
मिर्जापुर की गद्दी पर राज कर रहे अंखडानंद त्रिपाठी यानी कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) के साथ गुड्डू पंडित (अली फजल) और बबलू पंडित (जितेंद्र कुमार) उनके राइट और लेफ्ट हैंड हैं। कालीन भैया का बेटा मुन्ना (दिव्येंदु शर्मा) गद्दी संभालना चाहता है, लेकिन पिता को गुड्डू और बबलू पर ज्यादा भरोसा है।
फिल्म में जौनपुर से जैसलमेर तक के बाहुबली मिर्जापुर की गद्दी पर नजर गड़ाए बैठे हैं। बाहुबली बब्बन यादव (रवि किशन) मिर्जापुर पर राज करने के लिए जाल बिछाता है, जिसमें कालीन भैया और उनके लोग फंस सकते हैं। कहानी कई चौंकाने वाले मोड़ के साथ आगे बढ़ती है।
फिल्म के लेखक पुनीत कृष्णा ने इसे वेब सीरीज से अलग रखा है और पुराने डायलॉग दोहराए बिना संवादों को पूर्वांचल के लहजे में प्रस्तुत किया है। मिर्जापुर की सिग्नेचर म्यूजिक, संजय कपूर की सिनेमैटोग्राफी और मनन अश्विन मेहता की एडिटिंग फिल्म को स्टाइलिश बनाती है।
ढांडा न्योलीवाला का रैप और कार रेस वाला सीन रोमांचक है। हालांकि, मध्यांतर से पहले फिल्म धीमी है और क्लाइमैक्स का एक्शन सीन लंबा खिंच गया है। गुड्डू द्वारा खुद को स्टेरॉयड इंजेक्शन लगाना बचकाना लगता है। पुलिस की अनुपस्थिति भी फिल्म में खलती है।
अभिनय की बात करें तो पंकज त्रिपाठी अपने अंदाज में हैं, लेकिन इस बार खलनायक कम और हीरो ज्यादा लगते हैं। अली फजल भौकाल मचाने में पीछे नहीं हैं। जितेंद्र कुमार मास्टरमाइंड बबलू के रोल में प्रभावी हैं। दिव्येंदु शर्मा मुन्ना के रोल में भरोसेमंद दिखते हैं।
रवि किशन क्रूर बाहुबली और प्रेमी के रोल में जंचते हैं। रसिका दुग्गल बीना त्रिपाठी के आइकॉनिक रोल में और चौकाएंगी। कुलभूषण खरबंदा कम सीन में भी याद रह जाते हैं। श्वेता त्रिपाठी और श्रिया पिलगांवकर के सीन खास नहीं लगे। अभिषेक बनर्जी के छोटे रोल की सराहना होती है। मोहित मलिक का दिलजले प्रेमी का रोल बढ़िया है। शीबा चड्ढा और राजेश तैलंग के पास कम सीन हैं, लेकिन छाप छोड़ते हैं। सोनल चौहान का रोल अधूरा है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके मुख्य किरदारों के साथ सपोर्टिंग पात्र हैं, जिन्हें मंझे हुए कलाकारों ने निभाया है। इसके साथ ही फिल्म का मार्केटिंग और पीआर भी प्रभावशाली है।
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