मारुति की ईको ने 16 साल में 15 लाख यूनिट बिक्री का माइलस्टोन पार किया
सस्ती, व्यावहारिक वैन ने ग्रामीण और व्यावसायिक ग्राहकों में लोकप्रियता बनाई
मारुति सुजुकी की ईको वैन ने भारत में 16 वर्षों में 15 लाख यूनिट की बिक्री का आंकड़ा पार किया है। यह वैन विभिन्न वेरिएंट्स में उपलब्ध है और भारतीय बाजार की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन की गई है, जिसमें सुरक्षा और माइलेज के आधुनिक फीचर्स शामिल हैं।
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मारुति सुजुकी की पॉपुलर वैन ईको ने भारत में अपने लॉन्च के 16 साल में 15 लाख यूनिट की संचयी बिक्री का महत्वपूर्ण माइलस्टोन पार कर लिया है। जनवरी 2010 में ओमनी की जगह आई यह वैन पैसेंजर, कार्गो और व्यावसायिक उपयोग के क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
ईको को खास तौर पर भारतीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था और इसकी व्यावहारिकता ने इसे काफी लोकप्रिय बनाया है। ग्रामीण बाजार, पहली बार वाहन खरीदने वाले ग्राहक और व्यावसायिक खरीदार इसकी सफलता के मुख्य आधार रहे हैं।
हालिया पांच लाख यूनिट की बिक्री महज साढ़े तीन साल में हुई, जो अब तक का सबसे तेज माइलस्टोन है। वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रामीण बाजार का योगदान 65 प्रतिशत रहा, जबकि 55 प्रतिशत खरीदार पहली बार वाहन खरीदने वाले थे और 51 प्रतिशत से अधिक व्यावसायिक मालिक थे।
ईको 13 वेरिएंट्स में उपलब्ध है, जिनमें पांच और छह सीटर पैसेंजर, टूर वी, एंबुलेंस और कार्गो विकल्प शामिल हैं। इसकी एक्स-शोरूम कीमत मात्र ₹5,28,400 से शुरू होती है। डिजाइन में यह सिंपल और स्पेसियस वैन है, जो व्यावहारिक जरूरतों को पूरा करती है।
हाल ही में पेश किए गए स्टार एडिशन में 18 एक्सक्लूसिव एक्सटीरियर और इंटीरियर एक्सेसरीज के साथ बॉडी-कलर्ड बंपर दिए गए हैं। इंटीरियर में डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, एयर कंडीशनिंग, एचवीएसी कंट्रोल्स, डोम लैंप (बैटरी सेवर फंक्शन के साथ) और रीकलाइनिंग फ्रंट सीट्स जैसे फीचर्स मौजूद हैं।
सुरक्षा के लिहाज से 2026 मॉडल में छह एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम, एबीएस, ईबीडी, रिवर्स पार्किंग सेंसर, सभी सीटों के लिए थ्री-पॉइंट ईएलआर सीटबेल्ट्स, सीटबेल्ट रिमाइंडर और स्पीड अलर्ट सिस्टम शामिल हैं। साइड-इम्पैक्ट बीम्स भी सेफ्टी पैकेज का हिस्सा हैं।
ईको 1.2-लीटर के-सीरीज डुअल जेट डुअल वीवीटी पेट्रोल इंजन से लैस है। पेट्रोल वर्जन का क्लेम्ड माइलेज 19.71 किमी प्रति लीटर है, जबकि एस-सीएनजी वर्जन 26.78 किमी प्रति किग्रा देता है। एस-सीएनजी की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2019-20 के 12 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 48 प्रतिशत हो गई है, जो इसकी किफायती मांग को दर्शाता है।
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