लखीमपुर खीरी में नवोदित कवियों ने प्रस्तुत की भावपूर्ण रचनाएं
संस्था परिवर्तन फाउंडेशन के आयोजन में कविता लेखन से बच्चों को जोड़ा गया
लखीमपुर खीरी में परिवर्तन फाउंडेशन के द्वारा काव्य उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें नवोदित कवियों ने देशप्रेम, स्वतंत्रता संग्राम और त्योहारों पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं। आयोजन में वरिष्ठ और युवा कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मनोबल बढ़ाया और हिंदी भाषा के उत्थान पर चर्चा की गई।
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लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी में संस्था परिवर्तन फाउंडेशन के तत्वावधान में काव्य उत्सव का आयोजन हुआ। इस दौरान नवोदित कवियों ने देशप्रेम, स्वतंत्रता संग्राम और त्योहारों की भावनाओं से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। संस्था अध्यक्ष श्रवण कुमार मिश्र ने आगंतुक कवियों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्था हिंदी भाषा के उत्थान के लिए लगातार प्रयासरत है और मासिक काव्य गोष्ठियों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है।
वरिष्ठ कवि राजकुमार सिंह ‘राज’ ने वीर सावरकर के देशप्रेम और संघर्ष को अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। नवोदित कवयित्री चारु पाल ने भावपूर्ण रचना सुनाई, जबकि युवा कवि अवरेंद्र अवस्थी ‘फौजी’ ने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए देशप्रेम से भरी कविता प्रस्तुत की। वरिष्ठ कवि गोपाल शुक्ला ने सावन और रक्षाबंधन की भावनाओं को अपनी रचना में पिरोया।
काव्य पाठ के दौरान श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं पर तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर इंद्रेश्वर नाथ गुप्त, नारायण सिंह गौर, सार्थक सिंह, राधेश्याम कश्यप सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।
डॉ. इरा श्रीवास्तव ने बताया कि श्याम किशोर बेचैन बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर कविता लेखन के माध्यम से रचनात्मक कार्यों से जोड़ रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- संस्था परिवर्तन फाउंडेशन किस प्रकार के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करती है?
- संस्था मासिक काव्य गोष्ठियों का आयोजन नियमित रूप से करती है।
- काव्य उत्सव में कौन-कौन से साहित्यप्रेमी मौजूद थे?
- इंद्रेश्वर नाथ गुप्त, नारायण सिंह गौर, सार्थक सिंह, राधेश्याम कश्यप आदि उपस्थित थे।
- नवोदित कवयों की प्रस्तुतियों में मुख्य विषय क्या थे?
- प्रस्तुत कविताएं देशप्रेम, स्वतंत्रता संग्राम और त्योहारों की भावनाओं पर आधारित थीं।
- श्रमण कुमार मिश्र ने अपने स्वागत भाषण में क्या उल्लेख किया?
- उन्होंने संस्था के हिंदी भाषा के उत्थान के सतत प्रयासों को प्रमुखता से बताया।
- श्रमण कुमार मिश्र के अलावा और कौन कवि शामिल थे?
- वरिष्ठ कवि राजकुमार सिंह ‘राज’, नवोदित कवयित्री चारु पाल, युवा कवि अवरेंद्र अवस्थी ‘फौजी’ और गोपाल शुक्ला भी शामिल थे।
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