तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप, राहत कार्य जारी
नेपाल में बाढ़ के बाद तिब्बत में भूकंप से तबाही, मलबे में फंसे लोगों की तलाश
तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर गहरा था। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, जिसमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए विशेष उपकरण और कुत्तों की मदद ली जा रही है। हिमालयी क्षेत्र में भूकंप ने पहले से मौजूद ग्लेशियर आपदा और बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
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तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया है, जिसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर गहरा था। इस भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य जोर-शोर से चल रहे हैं, मलबे में फंसे लोगों की सांसों को तलाशने के लिए विशेष उपकरण और कुत्तों की टीमें तैनात हैं।
नेपाल में आई बिना बारिश की बाढ़ ने हजारों लोगों की जान ले ली है और सैकड़ों अभी भी लापता हैं। इस तबाही के ठीक बाद तिब्बत में भूकंप ने इलाके में दहशत फैला दी है। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई, जो मध्यम श्रेणी का माना जाता है। इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था।
भूकंप के झटके महसूस होते ही सीमा से सटे इलाकों में लोग सुरक्षित जगहों की ओर भागे। राहत और बचाव कार्यों में जुटी टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश में लगी हैं। चीनी स्टेट ब्रॉडकास्टर की रिपोर्ट के अनुसार, लाइफ-डिटेक्शन उपकरण और स्निफर डॉग्स की मदद से मलबे को खंगाला जा रहा है ताकि किसी भी जीवित व्यक्ति को बचाया जा सके।
तिब्बत-नेपाल सीमा पर हाल ही में एक विशाल ग्लेशियर गिरा था, जिससे बर्फ, चट्टानें, कीचड़ और पानी का सैलाब निकला था। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,268 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 4,200 से अधिक लापता हैं।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हालात गंभीर हैं। भारी बारिश और मलबे के कारण रास्ते, पुल और सड़कें बह चुकी हैं। नेपाल के केरुंग बॉर्डर से चीन को जोड़ने वाली मुख्य सड़क टूट गई थी, जिससे आपदा प्रभावित इलाकों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया था। अब कड़ी मेहनत के बाद इस सड़क को भारी वाहनों के लिए खोल दिया गया है, जिससे राहत सामग्री और उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं।
राहत कार्यों में जुटे कर्मी खतरनाक पहाड़ों को पार कर रहे हैं। संकरी घाटियों में लगातार बारिश और दरकती चट्टानों के कारण बचाव कार्य जोखिम भरा है। नदियों का बहाव सामान्य से छह से सात मीटर प्रति सेकंड तेज है, जिससे खुदाई मशीनें और उनके चालक भी मुश्किल में हैं।
इस भूकंप ने हिमालयी क्षेत्र में पहले से जारी ग्लेशियर आपदा और बाढ़ की तबाही को और बढ़ा दिया है। राहत कार्य अभी भी जारी हैं और मलबे में फंसे लोगों को बचाने की कोशिशें तेज हैं।
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