करौली में चुनाव चिन्ह आवंटन के साथ प्रचार तेज
55 वार्डों में 325 प्रत्याशी मैदान में, 9 सितंबर को 66 केंद्रों पर मतदान होगा
करौली। करौली नगर परिषद के निकाय चुनाव के तहत शुक्रवार को प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह दिए गए। रिटर्निंग अधिकारी एसडीएम राकेश कुमार रावत ने तय प्रक्रिया के अनुसार वार्डवार प्रत्याशियों को चिन्ह आवंटित किए। इसके बाद प्रचार में तेजी आ गई है।
चुनाव चिन्ह लेने के लिए सुबह से कई प्रत्याशी कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिससे उपजिला कलेक्टर कक्ष के सामने भीड़ जमा हो गई। भाजपा को कमल और कांग्रेस को हाथ का चुनाव चिन्ह मिला। निर्दलीय प्रत्याशियों को अलमारी, गुब्बारा, सेब, चप्पल जैसे अलग-अलग चिन्ह आवंटित किए गए। करौली नगर परिषद के 55 वार्डों में कुल 325 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
चुनाव चिन्ह मिलने के बाद प्रत्याशियों ने वार्डों में प्रचार तेज कर दिया है। वे मतदाताओं से संपर्क कर नाम के साथ चुनाव चिन्ह की पहचान भी पहुंचा रहे हैं। कई प्रत्याशी प्रचार सामग्री, पोस्टर और सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव चिन्ह को प्रमुखता दे रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए चुनाव चिन्ह ही मतदाताओं के बीच उनकी प्रमुख पहचान बन गया है।
निकाय चुनाव के पहले चरण में 9 सितंबर को मतदान होगा, जो नगर परिषद क्षेत्र के 66 मतदान केंद्रों पर संपन्न होगा। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों को पार्टी के तय चुनाव चिन्ह मिलने के कारण उन्हें अलग से चिन्ह आवंटित नहीं किए गए।
प्रदेश में 19 अगस्त को चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई थी। इसके बाद से आयोग ने अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाने का अभियान शुरू किया है। अब तक जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर सवा लाख से अधिक पोस्टर-बैनर हटाए जा चुके हैं। बावजूद इसके कई प्रत्याशी और राजनीतिक दल सार्वजनिक स्थलों जैसे सड़कों, गलियों, चौराहों और सरकारी भवनों पर प्रचार सामग्री लगा रहे हैं, जो आदर्श आचार संहिता और राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 का उल्लंघन है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार चुनावी खर्च सीमा बढ़ाई है। नगर निगम और नगर परिषद के लिए एक-एक लाख रुपए और नगरपालिका के लिए 50 हजार रुपए अधिक खर्च करने की अनुमति दी गई है। आयोग ने व्यय पर्यवेक्षकों और कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी जाए। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, व्यय पर्यवेक्षक और नगर निगम अधिकारी मिलकर अवैध प्रचार सामग्री को तुरंत हटाएंगे।
बिजली के खंभों, सरकारी दीवारों, सड़कों और चौराहों पर किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का प्रचार पूर्णतः वर्जित है। चुनावी सीमा से अधिक खर्च करने पर प्रत्याशी को अगले चुनाव से प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।
प्रत्याशी प्रचार में सोशल मीडिया का भी उपयोग कर रहे हैं। चुनाव चिन्ह और क्रमांक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जा रहे हैं। नामांकन वापसी के बाद मुकाबले की तस्वीर साफ हो चुकी है और आने वाले दिनों में वार्डों में नारों, पोस्टरों और प्रचार वाहनों के साथ चुनाव चिन्हों की चर्चा बढ़ेगी।
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