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Urdu Poetry: उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
By न्यूज़ डेस्क
Urdu Poetry: उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो कुछ रिश्तों की रौशनी यादों में जिंदा रहती है।
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।” — बशीर बद्र
“आप के बा'द हर घड़ी हमने आप के साथ ही गुज़ारी है।” — गुलज़ार
“तुम भूल कर भी याद नहीं करते हो कभी, हम तो तुम्हारी याद में सब कुछ भुला चुके।” — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“याद उसे इंतिहाई करते हैं, सो हम उसकी बुराई करते हैं।” — जौन एलिया
“कौन सी बात है तुममें ऐसी, इतने अच्छे क्यों लगते हो?” — मोहसिन नक़वी
“वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो, हौसले मुश्किलों में पलते हैं।” — महफूज़ुर्रहमान आदिल
ज़िन्दगी एक टूटते-बनते सफर की तरह—यादें, उम्मीदें और इम्तहान पूरे सफर को गहराई देती हैं। पढ़ते रहिए, महसूस करते रहिए।