विभाजन की विभीषिका से सीख लेकर वर्तमान पीढ़ी रहे सजग: बाबूलाल
भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, जयपुर की ओर से गुरुवार को पाथेय भवन स्थित श्री नारद सभागार में संगोष्ठी और नाट्य मंचन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लेखक और विचारक होनगासंद्र वेंकटरमय्या शेषाद्रि की ऐतिहासिक कृति ‘और देश बंट गया’ पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकार, शिक्षाविद् और पत्रकार शामिल हुए।
परिषद् के प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश भार्गव ने बताया कि कार्यक्रम आगामी लोकमंथन समारोह की शृंखला के तहत आयोजित किया गया।
##1947 की त्रासदी को केवल इतिहास मानकर न भूलें
मुख्य वक्ता एवं जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने अखंड भारत की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की बड़ी त्रासदियों में से एक था। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को उस दौर की परिस्थितियों और उसके परिणामों को समझते हुए राष्ट्रीय एकता के प्रति सजग रहना चाहिए।
बाबूलाल ने विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, हिंसा और महिलाओं-बच्चों पर हुए अत्याचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लाखों परिवारों को अपनी जन्मभूमि छोड़नी पड़ी और असंख्य लोगों ने हिंसा की पीड़ा झेली। उन्होंने विभाजन के पीछे तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों और विभाजनकारी शक्तियों की भूमिका पर भी अपने विचार रखे।
>उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और जनसंख्या संबंधी बदलावों पर चिंता व्यक्त की।
##साहित्य के नए आयामों पर काम कर रही परिषद्
प्रदेश महामंत्री विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ ने बीज वक्तव्य में साहित्य परिषद् की गतिविधियों और नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साहित्य के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से परिषद् ने बाल साहित्य, युवा पाठक, शोध और लोक साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए नए प्रकोष्ठ गठित किए हैं।
##‘और देश बंट गया’ के मंचन ने किया भावुक
दिल्ली के अदिति महाविद्यालय की छात्राओं ने ‘और देश बंट गया’ नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से विभाजन के दौरान लोगों के विस्थापन, बिछड़ते परिवारों और मानवीय त्रासदी को मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति के कई दृश्य भावुक कर देने वाले रहे और सभागार में मौजूद दर्शक गंभीर नजर आए।
स्वागताध्यक्ष राधा गोविंद करोल ने राष्ट्र सेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया। प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. केशव शर्मा ने अतिथियों का परिचय कराया। प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश भार्गव ने आभार व्यक्त करते हुए देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने का संदेश दिया।
## साहित्य और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यक्रम में परिषद् के प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. विपिनचंद्र पाठक, सेवा भारती के मूलचंद सोनी, पाथेय कण के सह प्रबंध संपादक श्याम सिंह, प्रांत सह कार्यवाह कृष्ण कुमार अडाणिया, जयपुर महानगर प्रचारक प्रशांत, प्रो. नंद किशोर पाण्डेय, डॉ. इंदु शेखर तत्पुरुष, प्रो. अल्पना कटेजा, कमांडर प्रियंका चौधरी, इंद्र कुमार भंसाली, डॉ. संजय यादव, विद्याराम गुर्जर, घनश्याम सिंह देवल, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. अंशुमान शर्मा, मधुसूदन सिंह देवल, मुरारी गुप्ता, प्रणु शुक्ला, श्रीकांत भारद्वाज और शिवराज भारती सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
सरस्वती वंदना निर्मला आर्य ने प्रस्तुत की। परिषद् गीत राहुल सैनी और दीप गीत लाक्षकी चौधरी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संयोजन रवि पारीक तथा सह संयोजन अनिल तिवाड़ी ने किया। मंच संचालन डॉ. नमिता चौहान ने किया, जबकि कार्यक्रम प्रतिवेदन डॉ. रेवंत दान ने प्रस्तुत किया।
भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, जयपुर की ओर से गुरुवार को पाथेय भवन स्थित श्री नारद सभागार में संगोष्ठी और नाट्य मंचन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लेखक और विचारक होनगासंद्र वेंकटरमय्या शेषाद्रि की ऐतिहासिक कृति ‘और देश बंट गया’ पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकार, शिक्षाविद् और पत्रकार शामिल हुए। परिषद् के प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश भार्गव ने बताया कि कार्यक्रम आगामी लोकमंथन समारोह की शृंखला के तहत आयोजित किया गया। ##1947 की त्रासदी को केवल इतिहास मानकर न भूलें मुख्य वक्ता एवं जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने अखंड भारत की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की बड़ी त्रासदियों में से एक था। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को उस दौर की परिस्थितियों और उसके परिणामों को समझते हुए राष्ट्रीय एकता के प्रति सजग रहना चाहिए। बाबूलाल ने विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, हिंसा और महिलाओं-बच्चों पर हुए अत्याचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लाखों परिवारों को अपनी जन्मभूमि छोड़नी पड़ी और असंख्य लोगों ने हिंसा की पीड़ा झेली। उन्होंने विभाजन के पीछे तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों और विभाजनकारी शक्तियों की भूमिका पर भी अपने विचार रखे। >उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और जनसंख्या संबंधी बदलावों पर चिंता व्यक्त की। ##साहित्य के नए आयामों पर काम कर रही परिषद् प्रदेश महामंत्री विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ ने बीज वक्तव्य में साहित्य परिषद् की गतिविधियों और नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साहित्य के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से परिषद् ने बाल साहित्य, युवा पाठक, शोध और लोक साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए नए प्रकोष्ठ गठित किए हैं। ##‘और देश बंट गया’ के मंचन ने किया भावुक दिल्ली के अदिति महाविद्यालय की छात्राओं ने ‘और देश बंट गया’ नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से विभाजन के दौरान लोगों के विस्थापन, बिछड़ते परिवारों और मानवीय त्रासदी को मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति के कई दृश्य भावुक कर देने वाले रहे और सभागार में मौजूद दर्शक गंभीर नजर आए। स्वागताध्यक्ष राधा गोविंद करोल ने राष्ट्र सेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया। प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. केशव शर्मा ने अतिथियों का परिचय कराया। प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश भार्गव ने आभार व्यक्त करते हुए देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने का संदेश दिया। ## साहित्य और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियां रहीं मौजूद कार्यक्रम में परिषद् के प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. विपिनचंद्र पाठक, सेवा भारती के मूलचंद सोनी, पाथेय कण के सह प्रबंध संपादक श्याम सिंह, प्रांत सह कार्यवाह कृष्ण कुमार अडाणिया, जयपुर महानगर प्रचारक प्रशांत, प्रो. नंद किशोर पाण्डेय, डॉ. इंदु शेखर तत्पुरुष, प्रो. अल्पना कटेजा, कमांडर प्रियंका चौधरी, इंद्र कुमार भंसाली, डॉ. संजय यादव, विद्याराम गुर्जर, घनश्याम सिंह देवल, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. अंशुमान शर्मा, मधुसूदन सिंह देवल, मुरारी गुप्ता, प्रणु शुक्ला, श्रीकांत भारद्वाज और शिवराज भारती सहित अनेक लोग मौजूद रहे। सरस्वती वंदना निर्मला आर्य ने प्रस्तुत की। परिषद् गीत राहुल सैनी और दीप गीत लाक्षकी चौधरी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संयोजन रवि पारीक तथा सह संयोजन अनिल तिवाड़ी ने किया। मंच संचालन डॉ. नमिता चौहान ने किया, जबकि कार्यक्रम प्रतिवेदन डॉ. रेवंत दान ने प्रस्तुत किया।
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