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    "headline": "एवरेस्ट ग्लेशियर पिघला रहा है इंसानी पेशाब से",
    "summary": "माउंट एवरेस्ट के खुम्बू ग्लेशियर पर बेस कैंप में पर्वतारोहियों के पेशाब से निकलने वाली गर्मी से बर्फ पिघलने की मात्रा बढ़ रही है, लेकिन यह ग्लेशियर पिघलने का मुख्य कारण नहीं है। ग्लेशियर पिघलाव का लगभग 94 फीसदी हिस्सा बेस कैंप पर इस्तेमाल होने वाले ईंधन से उत्पन्न गर्मी के कारण होता है। वैज्ञानिकों ने बेहतर कचरा प्रबंधन और सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।",
    "articleBody": "माउंट एवरेस्ट के खुम्बू ग्लेशियर पर इंसानी गतिविधियों से पिघलाव बढ़ रहा है। नेपाल और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने बताया कि बेस कैंप में पर्वतारोहियों के पेशाब से निकलने वाली गर्मी ग्लेशियर की बर्फ पिघलाने में भूमिका निभा रही है।\n\nशोध में सामने आया है कि 2023 के चढ़ाई सीजन में बेस कैंप पर रोजाना करीब 6,766 लीटर पेशाब जमा हुआ। खिम लाल गौतम और सहयोगियों ने बताया कि पेशाब अपने साथ इतनी गर्मी लेकर आता है कि इससे करीब 154 टन बर्फ पिघल गई। हालांकि, शरीर से निकला पेशाब ठंडा होने पर उसकी गर्मी का केवल एक छोटा हिस्सा ही बर्फ तक पहुंचता है।\n\nवैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि इंसानी पेशाब ग्लेशियर पिघलने का सबसे बड़ा कारण नहीं है। बेस कैंप पर इस्तेमाल होने वाला ईंधन ग्लेशियर के लिए कहीं बड़ा खतरा है। खाना पकाने, गर्मी और बिजली के लिए इस्तेमाल हुए ईंधन से पैदा होने वाली गर्मी ग्लेशियर पिघलाव के करीब 94 फीसदी हिस्से के लिए जिम्मेदार है, जबकि पेशाब का योगदान करीब 6 फीसदी है।\n\nएवरेस्ट बेस कैंप खुम्बू ग्लेशियर के ऊपर बनाया गया है, जहां किचन, शॉवर, जनरेटर और वाई-फाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। कुछ जगहों पर फर्श को गर्म रखने की व्यवस्था भी होती है, जो जमीन के तापमान को बढ़ाकर ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार तेज करती है।\nयह भी पढ़ें\nसर्वेश कुशवाहा बने काशी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत\nगौराबादशाहपुर में जनपद स्तरीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता संपन्न\nनेपाळच्या परराष्ट्र मंत्र्याने भारताकडून नुकसानभरपाईची मागणी नाकारली\n1259 Deaths in Nepal Floods, India Begins DNA Identification Preparation\n\nशोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हिमालय के अन्य क्षेत्रों की तुलना में यह क्षेत्र तेजी से गर्म हो रहा है। 2019 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद बर्फ का नुकसान उससे पहले की अवधि की तुलना में दोगुना हो गया है। यहां तापमान करीब 0.28 डिग्री सेल्सियस प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है।\n\nशोध टीम ने बेस कैंप को मौजूदा जगह से हटाने के विकल्पों पर भी विचार किया है। उन्होंने दक्षिण-पश्चिम में दो संभावित नई जगहों की पहचान की है, लेकिन वहां कैंप बनाने से पर्यावरणीय नुकसान और आपदा का खतरा हो सकता है। इसके अलावा, नई जगह पर कैंप ले जाने में कई लॉजिस्टिक समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।\n\nशोधकर्ताओं ने बेहतर कचरा प्रबंधन और सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने की जरूरत बताई है। साथ ही, इंसानी गतिविधियों से पैदा होने वाली गर्मी को नियंत्रित करना भी आवश्यक होगा।\n\nइस मामले को लेकर वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी\nसांसद",
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    "published_at": "2026-09-05T09:04:38+00:00",
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            "name": "न्यूज़ डेस्क",
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    "key_takeaways": [
        "माउंट एवरेस्ट के खुम्बू ग्लेशियर पर बेस कैंप में इंसानी पेशाब से रोजाना लगभग 6,766 लीटर पेशाब जमा होता है।",
        "पेशाब में मौजूद गर्मी से करीब 154 टन बर्फ पिघल जाती है, पर यह ग्लेशियर पिघलने का मुख्य कारण नहीं है।",
        "बेस कैंप में इस्तेमाल होने वाला ईंधन ग्लेशियर पिघलाव का लगभग 94 फीसदी जिम्मेदार है।",
        "2019 के अध्ययन के अनुसार, 2000 के बाद हिमालय में बर्फ का नुकसान पहले की तुलना में दोगुना हो गया है।",
        "शोधकर्ताओं ने बेस कैंप को नई जगहों पर ले जाने और बेहतर कचरा प्रबंधन तथा सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह दी है।"
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    "faq": [
        {
            "question": "बेस कैंप पर पेशाब से ग्लेशियर कितना प्रभावित होता है?",
            "answer": "बेस कैंप पर रोजाना लगभग 6,766 लीटर पेशाब जमा होता है, जिससे करीब 154 टन बर्फ पिघलती है, लेकिन यह ग्लेशियर पिघलने का मुख्य कारण नहीं है।"
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        {
            "question": "ग्लेशियर के पिघलने का सबसे बड़ा कारण क्या है?",
            "answer": "ग्लेशियर के पिघलने का सबसे बड़ा कारण बेस कैंप में इस्तेमाल होने वाला ईंधन है, जो पिघलाव का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा जिम्मेदार है।"
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        {
            "question": "बेस कैंप को नई जगह पर क्यों ले जाने पर विचार किया जा रहा है?",
            "answer": "शोधकर्ताओं ने बेस कैंप को नई जगहों पर ले जाने पर विचार किया है ताकि ग्लेशियर पर दबाव कम किया जा सके, हालांकि इससे पर्यावरणीय नुकसान और लॉजिस्टिक समस्याएं हो सकती हैं।"
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            "question": "हिमालय में तापमान कितनी दर से बढ़ रहा है?",
            "answer": "हिमालय में तापमान लगभग 0.28 डिग्री सेल्सियस प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है।"
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            "question": "ग्लेशियर संरक्षण के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?",
            "answer": "शोधकर्ताओं ने बेहतर कचरा प्रबंधन, सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने और इंसानी गतिविधियों से पैदा होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने की सलाह दी है।"
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            "date": "2019",
            "event": "एक अध्ययन में पाया गया कि वर्ष 2000 के बाद हिमालय में बर्फ का नुकसान दोगुना हो गया है।"
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            "event": "चढ़ाई सीजन में बेस कैंप पर रोजाना करीब 6,766 लीटर पेशाब जमा होने की जानकारी मिली।"
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